मामूली पाकेटमार से बना कुख्यात डाकू
चित्रकूट (ब्यूरो)। डाकू ललित पटेल नयागांव थाना पौशलहा गांव निवासी जोकर पटेल का मझला बेटा था। उसका जन्म बांदा स्थित ननिहाल में हुआ था। बाद में वह पौशाला गांव में रहने लगा। बताया जाता है कि शुरुआत में वह मामूली पाकेटमार था। इस दौरान वह पुलिस के संपर्क में आ गया। पुलिस ने उसे मुखबिर बना लिया। बताया जाता है कि इसी बीच वह डकैतों के जीवन से प्रभावित हो गया। पुलिस की मुखबिरी छोड़कर वह खुद ही डकैत बन गया। कुछ पुलिस अधिकारी इस बात को स्वीकार करतेे हैं कि पहले वह मुखबिर था।
इंटर तक की थी पढ़ाई
चित्रकूट (ब्यूरो)। डाकू ललित पटेल तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। उसने पढ़ाई लिखाई पालदेव स्थित शासकीय स्कूल से शुरू की। प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद ललित ने कामतन स्थित शासकीय स्कूल में दाखिला लिया। यहीं से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद रोजगार की तलाश में भटकता रहा। मुंबई जाकर पान की दुकान भी की। एक फैक्ट्री में काम भी किया, लेकिन उसका मन नहीं लगा। गांव आने पर डकैतों की संगत में पड़ जाने से वह भी डकैत बन गया।
घर बनवाने के लिए लिया था लोन
चित्रकूट (ब्यूरो)। ललित का पिता नारायण पटेल उर्फ जोकर खेतिहर मजदूर है। सात संतानों के पालन-पोषण में ही कमाई खर्च हो जाती थी। पुराना घर पूरी तरह से जर्जर हो गया था। घर बनवाने के लिए मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत ललित ने पालदेव स्थित बैंक से एक लाख का कर्ज लिया। इस पैसे से उसने पौसलहा में दो कमरों का घर बनवाया। बैंक से लिया गया कर्ज अभी चुकाया नहीं गया है।
महीने भर बाद ही पत्नी ने छोड़ दिया साथ
चित्रकूट (ब्यूरो)। ललित और उसके बडे़ भाई नंदी का विवाह एक ही गंाव में हुआ था। विवाह के बाद ललित और नंदी की पत्नी एक माह तक ससुराल में रहने के बाद मायके चली गई। दोबारा लौटकर नहीं आईं। दोनों की पत्नियों ने उनकी कुछ आदतों के कारण साथ रहने से मना कर दिया था।
एक भाई अभी जेल में
चित्रकूट (ब्यूरो)। ललित का छोटा भाई कुकरखवा भी गिरोह में शामिल था। मोहकमगढ़ निवासी जानकीशरण गोड़ के अपहरण में नाम आने के बाद पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया था। कुकुररखवा अभी जेल में हैं। तीसरा भाई नंदी अभी भी गिरोह में है। पुलिस सूत्रों के अनुसार मुठभेड़ के दौरान ललित के साथ नंदी भी था। ललित को गोली लगते ही नंदी जान बचाकर भाग निकला।
एसपी ने 20 वें दिन कर दिया ढेर
चित्रकूट (ब्यूरो)। सतना के एसपी बनाए जाने के साथ ही राजेश हिंगणकर को जिले में सिर उठा रहे डकैतों का सफाया करने का टारगेट पुलिस मुख्यालय भोपाल से मिल चुका था। इस गैंग को टारगेट बनाते हुए जंगल में कैंप किया। आईजी रीवा जोन अंशुमान यादव ने खुद जंगल में उतरक र पुलिस टीम की अगुवाई की। डकैतों को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए रणनीति बनाई। चार डीएसपी के अलावा 125 पुलिस कर्मियों को जंगल में उतारा गया था। 11वें दिन बरौंधा के बरीगढ़ जंगल में ललित गिरोह के तीन डकैत को गिरफ्तार करने से सफलता मिली। मुखबिरों ने ललित के बारे में सूचना देना शुरू किया तो 20 वें दिन पुलिस टीम ने डकैत को ढेर कर दिया।
डाकू ललित पर 12 मामले हैं दर्ज
चित्रकूट (ब्यूरो)। ललित पटेल पर दर्ज मुकदमों में 14 जनवरी को नया गांव थाना अंतर्गत मोहकमगढ़ से जानक ीशरण गौड़ का अपहरण, फरवरी में चौबेपुर के पास से दो चरवाहों का अपहरण, फरवरी में ही चौबेपुर के पास से दो चरवाहों का अपहरण, रंगदारी के लिए खरहा सरपंच के घर पर हमला। जुगलपुर से फिरौती के लिए युवक का अपहरण, तेंदूपत्ता फड़ के मुंशी को रंगदारी के लिए धमकाना, तीन युवकों को अगवा कर जिंदा जलाना, नौ जुलाई को बरौंधा थाना के मुड़ियादेव से हेड मास्टर का अपहरण किया। एसपी सतना के अनुसार ललित के खिलाफ बरौंधा और नयागांव में अपहरण और रंगदारी के दस मामले दर्ज हैं। चित्रकूट जिले में भी दो मामले दर्ज हैं।
इस टीम को मिली कामयाबी
चित्रकूट । डाकू ललित पटेल को मारने वाली टीम का नेतृत्व एसपी राजेश हिंगणकर कर रहे थे। टीम में मैहर एसडीओपी बीडी पांडेय, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एडी टीम के प्रभारी अनिमेष द्विवेदी, एसआई कप्तान सिंह, कांस्टेबल अनिल तिवारी, बृजेश सिंह, राघवेंद्र सिंह, तुलसीदास रावत, चंद्रशेखर दोहरे शामिल रहे। दूसरी टीम में नयागांव एसडीओपी आलोक शर्मा, नयागांव टीआई सुधांशु तिवारी, एडी टीम के सब इंस्पेक्टर ओपी चोंगड़े भी शामिल रहे।
मुन्ना की बहनें बोलीं, ललित की मौत से मिला सुकून
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। डाकू ललित पटेल के मारे जाने की जानकारी होते ही थर पहाड़ निवासी पप्पू यादव की तीनों बहनें खुशी-खुशी गांव पहुंचीं। तीनों ने कहा कि उनके भाई मुन्ना यादव के हत्यारे की मौत होने से सुकून मिला है। रक्षाबंधन पर भाई को याद कर रो पड़ीं। रिश्तेदारों के साथ चौबेपुर गांव जाकर दूसरे भाइयों को राखी बांधी।
30 जुलाई को डाकू ललित ने डाकू गोप्पा गैंग से मुखबिरी करने के शक पर थरपहाड़ निवासी मुन्ना यादव का अपहरण कर लिया था। इसके बाद दो अन्य ग्रामीणों के साथ तीनों को पहाड़ के ऊपर गोली मारकर शव कोल्हुआं खंभरिया के जंगल में जला दिया था। इससे सहमा उसका परिवार गांव छोड़कर चौबेपुर में बस गया है। मृतक मुन्ना की तीन बहनें हैं। बैइया बगलई, सुशीला और मुन्नू झरी गांव में ब्याही हैं। रविवार को डाकू ललित के मारे जाने के बाद सोमवार को रक्षाबंधन मनाने गांव पहुंचीं तो रिश्तेदारों से मिलकर डाकू के मारे जाने पर खुशी जताई। तीनों ने कहा कि डाकू ललित ने उसके निर्दोष भाई को मार दिया था। इसके बाद तीनों ने चौबेपुर जाकर दूसरे भाई पप्पू और अन्य को राखी बांधी। पप्पू की कलाई में दो राखी बांधकर सुशीला ने कहा कि यह राखी भाई मुन्ना के नाम की है, जो अब इस दुनिया में नहीं है।