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पहली बैठक में बन गईं ग्राम विकास के लिए समितियां

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चित्रकूट/मऊ/मानिकपुर/रामनगर/पहाड़ी। बृहस्पतिवार को जिले के पांचों विकास खंडों की 331 ग्राम पंचायतों में 245 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों एवं 2,752 ग्राम पंचायत सदस्यों की पहली बैठक हुई। इसमें खंड विकास अधिकारियों के अलावा ग्राम विकास अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में ग्राम पंचायतों में छह समितियों का गठन भी किया गया है। प्रधान व सदस्यों ने अपने गांव के विकास के लिए कुछ कामों की प्राथमिकता बताई है, जिसका प्रस्ताव बनाया जा रहा है।
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बृहस्पतिवार को गांवों के पंचायत भवनों में पहली बैठकें की र्गइं। बीडीओ, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, पंचायत मित्र, तकनीकी सहायक अपने गांव में पहली बैठक में मौजूद ग्राम प्रधानों व सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कोविड-19 के बचाव एवं रोकथाम के संबंध में गांव के लोगों को इस महामारी के प्रति जागरूक करने और अधिक से अधिक लोगों का वैक्सीनेशन के निर्देश दिए।
साथ ही विकास कार्यों पर भी तेजी लाई जाए और मनरेगा योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायतों पर अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया कराया जाए। इसके पूर्व सर्वसम्मति से नियोजन एवं विकास समिति, शिक्षा समिति, निर्माण कार्य समिति, स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति, प्रशासनिक समिति व जल प्रबंधन समिति का गठन कोरम के अनुसार किया गया है।
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पहली बैठक के दौरान नवनिर्वाचित प्रधानों ने सदस्यों से कहा कि सभी मिलकर गांव के विकास कार्यों को बेहतर तरीके से कराने का प्रयास करेंगे। कुछ गांव में बैठक के दौरान बीडीओ राजेश नायक, बीडीओ हिमांशु पांडेय, बीडीओ विपिन कुमार सिंह, बीडीओ सुनील कुमार सिंह व बीडीओ धनंजय कुमार भी गांव जाकर पहली बैठक में शामिल हुए।
कई गांव में विकास कामों की प्राथमिकता के आधार पर सूची बनाने को कहा गया है। देहरूचमाफी गांव में ग्राम विकास अधिकारी जानकीशरण ने प्रधान सोनिया व ग्राम पंचायत सदस्यों के साथ बैठक की। इसी प्रकार पहाड़ी में प्रधान सुधादेवी व ग्राम पंचायत सदस्यों ने विकास कामों की सूची भी सौंपी है। वैसे तो जिले में कुल 331 ग्राम पंचायत हैं, लेकिन 86 गांव में ग्राम पंचायत सदस्यों का कोरम पूरा न होने से 245 प्रधान व 2725 सदस्यों को शपथ दिलाई गई है। शेष के लिए बाद में प्रक्रिया होगी।
ऑनलाइन शपथ ग्रहण के दौरान कई महिला ग्राम प्रधान और सदस्यों ने चेहरे से घूंघट नहीं हटाया था। कमोवेश बृहस्पतिवार को जब उनके गांव में ही पहली बैठक हुई तो स्थिति कुछ वैसी ही रही।
मौजूद अधिकारी व कर्मचारियों ने कई बार इसके लिए प्रयास भी किए, लेकिन कुछ स्थानों पर महिला प्रधान घूंघट हटाने को तैयार नहीं थीं। कुछ गांव में समितियों के बनने के बाद जब सभी प्रधान व सदस्यों के हस्ताक्षर कराये गये तो कई ने अंगूठा निशान लगाया।
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