पाठा क्षेत्र से लकड़ी लेकर बेचने मुख्यालय आईं कोल आदिवासी क्षेत्र की महिलाएं।
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मानिकपुर विधानसभा सीट में लगभग 40 हजार वोटर कोल आदिवासी हैं। यह जाति किसी भी चुनाव में महत्वपूणई भूमिका निभाती है। इसके बावजूद यह लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसते नजर आते हैं। लकड़ी काटकर बेचना व पत्थर तोड़ना इन लोगों की आजीविका के साधन हैं।
मानिकपुर सीट मेें कोल आदिवासी प्रत्याशियों के जीत में सबसे अहम भुमिका निभाते हैं। माना जाता है कि जिस प्रत्याशी को कोल मतदात समर्थन कर देते हैं उसकी जीत हो ही जाती है। हालांकि जीतने के बाद विधायक हों या सांसद इस क्षेत्र की ओर पलट कर भी नहीं देखते हैं।
यही कारण है कि आज भी यह लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए जंगलों और पहाड़ों पर निर्भर हैं। यह जाति आज भी जंगलों के पास ही रह रही है। विधान सभा चुनाव आने पर फिर से प्रत्याशी इनके घरों के चक्कर लगा है। जिनको आदिवासी खरी खोटी सुना रहे हैं।
पाठा क्षेत्र की पचास साल की केतनदेवी ने बताया कि चुनाव के समय सभी बड़ी बडी बातें करते हैं इसके बाद कोई नजर नहीं आता। जंगल पर उनकी पूरी आर्थिक व्यवस्था निर्भर है। जिस पर भी कभी कभार सरकारें अड़गा लगा देती हैं।
कोल आदिवासियों के लिए काम करने वाले इस समुदाय के नेता राजन कोल व नत्थू कोल ने बताया कि अधिकार पाने के लिए संघर्ष जारी है। कई बार सरकारी कार्यालयों में उनके काम जल्दी नहीं निपटाए जाते। सभी दलों के नेता भी इन्हें वोट बैंक के रूप में प्रयोग करते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि जंगल के पास रहने के कारण डाकू भी अक्सर ग्रामीणों को परेशान करते हैं।
कोल जाति के ज्यादातर लोग जंगल के पास घास फूस की झोपड़ी बना कर रहते हैं। जहां इनके घर बने हैं। उस जगह पर ना बिजली, पानी व सड़क जैसी कोई सुविधा नहीं हैं। महिलाएं जंगल से लकड़ी काट कर तो पुरुष पत्थर तोड़ कर जीवकोपार्जन करते हैं।