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भारतीय जीवन पद्धति में सहकारिता का समावेश

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फोटो- 7- सहकार भारती के अभ्यास वर्ग का शुभारंभ करते प्रदेश अध्यक्ष रमाशंकर जायसवाल - फोटो : CHITRAKUTT
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चित्रकूट। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अनुसांगिक संगठन सहकार भारती का दो दिवसीय प्रादेशिक अभ्यास वर्ग शनिवार को यहां उद्यमिता विद्यापीठ में शुरू हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं सहकार भारती के संस्थापक लक्ष्मण राव के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन से किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने सहकारिता के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय जीवन पद्धति संस्कृति एवं संस्कार में सहकारिता का समावेश है।
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अभ्यास वर्ग के प्रथम सत्र में स्वयं सेवकों को सहकार भारती की संकल्पना एवं भूमिका के विषय में बताया गया। सहकार भारती के प्रदेश अध्यक्ष रमाशंकर जायसवाल ने कहा कि भारतीय जीवन पद्धति संस्कृति एवं संस्कार में सहकारिता का समावेश है। संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री विष्णु बोबडे ने कहा कि देश स्वाधीन होने के बाद सरकार ने सहकारिता को एक जनोपयोगी कार्य समझकर इसे बढ़ाने में पर्याप्त रुचि ली। आर्थिक मदद देकर इसे खूब प्रोत्साहित किया। परिणामस्वरूप सहकारिता का प्रचार गांव-गांव तक हो गया। आज देश में साढ़े छह लाख सहकारी संस्थाएं हैं, जिनसे 21 करोड़ लोग जुड़े हैं।
इस मौके पर दिनेश कुमार दीक्षित, संजय पाचपोर को कामतानाथ भगवान का चित्र एवं शाल भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश महामंत्री सहकार भारती डॉ. प्रवीण सिंह जादौन ने किया। इस दौरान प्रेम सागर दीक्षित, राम सागर चतुर्वेदी, अजय तिवारी, रघुवर दयाल, निर्मलेंद्र पांडेय, गणेश मिश्रा, दुर्गेश द्विवेदी, हरिओम जायसवाल, अश्वनी अवस्थी व आशीष पांडेय आदि मौजूद रहे।
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