चित्रकूट। मंदाकिनी नदी को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया है।
वर्षों से गाद और झाड़ियों से पट चुके नालों को साफ कर नदी की बंद नालियों को खोलने का काम किया गया है। नदी को अविरल बनाने के लिए छह किमी तक 10 बरसाती नालों की सफाई की जा रही है।
पहले नाले बंद होने से बरसात का पानी खेतों में भर जाता था, जिससे सैकड़ों बीघा फसल डूब जाती थी और गांवों में जलभराव की समस्या होती थी। इसे देखते हुए डीएम पुलकित गर्ग की पहल पर जिला प्रशासन ने वीबी जी रामजी योजना के तहत मंदाकिनी के कैचमेंट एरिया को साफ सुथरा बनाने का फैसला लिया। बाद में प्रशासन ने मंदाकिनी नदी के कैचमेंट एरिया के 10 बड़े बरसाती नालों को चिह्नित किया।
ये नाले रेहुंटा, परसौंजा, लोहदा और सरधुआ गांवों से होकर गुजरते हैं और सीधे मंदाकिनी में मिलते हैं। जांच में पाया कि ये नाले दो से तीन फीट तक गाद से भर गए थे। प्रशासन ने चयनित सभी नालों की जेसीबी मशीनें लगाकर युद्धस्तर पर सफाई अभियान शुरू किया। करीब छह किलोमीटर की लंबाई में इन 10 नालों की गहरी खोदाई कराई गई। झाड़ियों को हटाया गया और गाद को निकालकर किनारे बांध मजबूत किए गए।
इस पूरे कार्य पर करीब 48 लाख रुपये की धनराशि खर्च की गई है। अब पानी का बहाव सीधा नदी में होगा। इससे बाढ़ का खतरा टलेगा और भूजल स्तर भी बढ़ेगा।सबसे बड़ा फायदा मंदाकिनी को होगा। बरसात का साफ पानी सीधे नदी में पहुंचने से उसकी सूखती धारा को नई जिंदगी मिलेगी। मंदाकिनी साल भर अविरल बहेगी।
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बोले जिम्मेदार
मंदाकिनी नदी को बचाने के लिए दस नाले चयनित किए गए हैं। ये काफी समय से बंद थे, इस कारण पानी निकासी नहीं हो पाती है। वीबी जी रामजी योजना में चयनित नालों की सफाई कराई गई है।- पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी।