चित्रकूट। दस्यु ददुआ के हाथी जय सिंह को दूसरे दिन वन विभाग की टीम व महावत ने मिलकर काबू में कर लिया। यह हाथी कई बार आतंक मचा चुका है। इसके बाद भी वन विभाग वन विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता है। जबकि, इस हाथी का वन विभाग में कोई पंजीयन नहीं है। हर बार मालिक को नोटिस देने की ही बात कहीं जाती है। मंगलवार की देर शाम तक गेढुआ नदी किनारे हाथी मौजूद रहा। कुछ दूरी पर मौजूद दो महावत उसके पास गन्ना व गुड़ आदि रखकर आए लेकिन अभी उसे गांव नहीं लाया गया।
दस्यु ददुआ के पुत्र पूर्व विधायक वीर सिंह हाथी जय सिंह की देखभाल करते हैं। यह हाथी सोमवार की दोपहर को प्रसिद्धपुर गांव एक शादी समारोह में गया था। जहां भड़क गया, जिसमें हाथी ने पहले महावत को उठाकर नीचे फेंक दिया। सड़क किनारे खडे़ एक डंपर को क्षतिग्रस्त कर लिया था। इसके बाद एक बगीचे में नाले के पास चला गया था, जिसको पुलिस सहित वन विभाग की टीम दूसरे दिन काबू में कर लिया। हाथी को अभी उसी स्थान पर रखा गया है। हाथी के उत्पात मचाने की यह तीसरी घटना है। हालांकि, घटना में हर बार कोई घायल नहीं होता है। इस हाथी का वन विभाग में कोई पंजीयन नहीं है। दस्यु ददुआ ने 2002 में इस हाथी को मध्यप्रदेश से खरीदा था। उसे चित्रकूट स्थित अपने गांव देवकली में रखा था। बाद में उसको फतेहपुर के कबरहा में बने हनुमान मंदिर में भेज था। अब एक महावत की देखरेख में यह हाथी रहता है जो शादी समारोह में ले जाता है। वन विभाग के डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि हाथी को काबू में कर लिया गया है। मामले को लेकर हाथी मालिक को नोटिस दी जाएगी।
हाथी रखने के लिए वन विभाग में पंजीकृत करना पड़ता है। इसमें हर साल हाथी के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र व उसके वजन के बारे में लिखित सूचना देनी पड़ी है। इसमें वजन धर्मकांटा से तौलाना पड़ता है। स्वास्थ्य के लिए पशु विभाग की डाक्टर की रिपोर्ट मांगी जाती है। इस समय वन विभाग में तीन हाथी पंजीकृत है। उधर, हाथी की देखरेख कर रहे पूर्व विधायक वीर सिंह ने बताया कि इसका पंजीयन है। इसके अलावा विभागीय सारी औपचारिकताएं पूरी हैं। वन विभाग का भी इसमें दायित्व होता है कि हाथी के बारे में जानकारी लें लेकिन वहां से ऐसा नहीं किया जाता है। हाथी को कोई जानबूझकर नहीं उकसाता है। फिलहाल उसकी स्थिति अब नियंत्रित है।