फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चित्रकूटः एक साल में एसएनसीयू ने बचाई 900 नवजातों की जान

विज्ञापन
विज्ञापन
चित्रकूट। जन्म के बाद नवजातों की जान बचाने में एसएनसीयू वरदान साबित हो रहा है। स्पेशल न्यू बार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) से अब तक जिले के 900 नवजात शिशुओं की जिंदगी बचाई गई।
विज्ञापन

मानिकपुर ब्लाक के रामपुर तरौंहा निवासी अशोक ने बताया कि उसकी पत्नी पूजा ने मानिकपुर स्वास्थ्य केंद्र में बच्चे को जन्म दिया। आधे घंटे बाद पता चला कि बच्चा बहुत ही तेजी से सांस ले रहा। घबराए परिजनों ने इसकी जानकारी डॉक्टर को दी। जांच के बाद डॉक्टरों ने बच्चे को जिला अस्पताल ले जाने को कहा। इसके बाद उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया। फिलहाल उसकी हालत में सुधार है। वहीं, मऊ ब्लाक के टिकरा निवासी जगदीश ने बताया कि पत्नी मंजू ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मऊ में बच्चे को जन्म दिया। उसके बच्चे को जन्म के बाद सांस लेने में परेशानी हो रही थी। बच्चा दूध भी नहीं पी रहा था। डॉक्टरों की सलाह पर मऊ अस्पताल से बच्चे को भर्ती किया है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर के गुप्ता कहते हैं कि गर्भ ठहरने से लेकर नवजात के जन्म के 28 दिन तक उसे विशेष निगरानी में रखने की जरूरत होती है। इस दरमियान नवजात की जान को सबसे ज्यादा खतरा होता है। वहीं, गर्भवतियो को दूध, हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, अंडे के साथ पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए। इस दौरान समय-समय पर जांच करानी भी जरूरी होती है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एके सिंह ने बताया कि एक साल (अप्रैल 2019 से फरवरी 2020 के बीच) में एसएनसीयू में गंभीर बीमारियों से ग्रसित लगभग 900 नवजातों का इलाज कर उनकी जिंदगी बचाई गई है। उन्होंने बताया कि जन्म के बाद नवजात के ठंडे पड़ने, पीला पड़ने, झटके आने, गर्भनाल के संक्रमण के खतरे, बुखार आने के साथ शरीर में कहीं भी मवाद भरे दाने निकलने की संभावनाएं होती हैं। एसएनसीयू के माध्यम से उपरोक्त जटिलताओं से ग्रसित नवजातों का जल्द से जल्द इलाज कर उन्हें बचाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें