शासन ने जिला जेल को 14 मई की गैंगवार के बाद उच्च सुरक्षा की श्रेणी में रखा है, जिसकी निगरानी अब ड्रोन कैमरे से कराई जाएगी। उधर, जेल परिसर में लगे 32 सीसीटीवी कैमरों में आधे कैमरे ठीक हो गए हैं और खराब कैमरों को बदलवाने की प्रक्रिया चल रही है।
जेल अधीक्षक अशोक सागर ने बताया कि शासन ने ड्रोन कैमरे से निगरानी के निर्देश दिए हैं। जल्द ही सुरक्षा का सामान मिल जाएगा। लखनऊ में डीजी जेल आनंद कुमार ने कहा है कि चित्रकूट के साथ लखनऊ, आजमगढ़, बरेली व गौतम बुद्धनगर की जेलों की निगरानी अब ड्रोन कैमरे से होगी।
इन जेलों में एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा और लैपटॉप के जरिए सभी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। इन जेलों को हाई सिक्योरिटी जेल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां आधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं। जिससे जेल में बंद माफिया व कुख्यात अपराधियों को कडे़ पहरे में रखा जा सके। चित्रकूट में 14 मई को हुई घटना के बाद से यह निर्णय लिया गया है।
गैंगवार से हिला था सुरक्षा सिस्टम
चित्रकूट जिला जेल में 14 मई की सुबह माफिया मुख्तार अंसारी गैंग के शार्प-शूटर जेल में बंद अंशू दीक्षित ने विदेशी पिस्टल से कुख्यात अपराधी मुकीम काला व मेराज अली को गोलियों से उड़ा दिया था। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर हत्यारोपी अंशू दीक्षित को भी मौत के घाट उतार दिया था।
जेल परिसर में इस तरह की यूपी की पहली घटना ने पूरे प्रदेश के सिस्टम को हिला कर रख दिया था। इस मामले की एक माह बाद भी जांच जारी है। इस घटना के बाद यूपी के सभी जेलों में सुरक्षा को लेकर कई बदलाव किए गए हैं।