चित्रकूट के मानिकपुर में पाठा क्षेत्र के गांवों में बाघ के हमलों से पशुपालक परेशान है। रविवार को चार मवेशी बाघ के हमले का शिकार हो गए। वहीं, वन विभाग का दावा है कि क्षेत्र में बाघ होने की अफवाह मात्र है, कोई साक्ष्य नहीं मिला है।
क्षेत्र के गांव मऊ गुरदरी, चमरौंहा व सकरौंहा गांवों में एक सप्ताह में लगभग 10 मवेशी जंगली जानवर का शिकार हो चुके हैं। मऊगुरदरी व सकरौंहा निवासी सुदामा मिश्रा, लाला भइया मिश्रा व चंद्रमणि तिवारी ने बताया कि रविवार की रात को बाघ ने खेतों में चरते समय उनके मवेशियों का शिकार किया है।
इसकी जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को दी गई है लेकिन कोई टीम गांव नहीं पहुंची। गांव के राजेंद्र मिश्रा, शिवकुमार यादव व चिरंगी लाल आदि ने दावा किया कि एक सप्ताह से इस क्षेत्र में बाघ छोटे मवेशियों पर हमला कर शिकार बना रहा है।
मामले में डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि बाघ की सूचना पर वनकर्मियों को जांच के लिए कुछ दिन पूर्व भेजा गया था। रिपोर्ट में बाघ के हमले की जानकारी नहीं है। आज फिर जानकारी मिली है। वनकर्मियों को भेजकर मामले की जानकारी कराई जाएगी।