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मदर्स-डे: संघर्ष और मेहनत से बेटियों की बनीं आदर्श, परिवार, समाज के प्रति कर्तव्य को बखूबी दे रहीं अंजाम

Mon, 10 May 2021 11:33 AM IST
शिखा पांडेय सुधीर अग्रवाल, अमर उजाला, चित्रकूट

सार

जानकीकुंड चित्रकूट के सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट के अस्पताल में 26 साल में लगभग एक लाख पथरी, प्रसव व महिला संबधी बीमारी के आपरेशन कर लोगों को नया जीवन देने वाली डॉ. निर्मला गेहानी देश व विदेशों तक में कई पुरस्कार पा चुकी हैं।
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मदर्स-डे 2021 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुश्किलों में हिम्मत नहीं हारी। किसी ने मदद की तो कोई देखकर अनदेखा करता रहा। लेकिन संघर्ष और कुछ कर गुजरने की इच्छा को कभी खत्म नहीं होने दिया। ईश्वर ने इसका फल दिया। आज वह अपनी बेटियों को वह सब कुछ देना चाहती हैं। जिसकी कमी उन्हें बचपन में अखरती रही। बेटियां भी अपनी मां को आदर्श मानकर उनके बताए रास्तों के अनुसरण कर रहीं है। चिकित्सा के क्षेत्र में ऐसी ही कुछ हस्तियों से मदर्स-डे पर एक बातचीत...
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26 साल में एक लाख आपरेशन कर चुकी हैं डॉ. गेहानी
जानकीकुंड चित्रकूट के सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट के अस्पताल में 26 साल में लगभग एक लाख पथरी, प्रसव व महिला संबधी बीमारी के आपरेशन कर लोगों को नया जीवन देने वाली डॉ. निर्मला गेहानी देश व विदेशों तक में कई पुरस्कार पा चुकी हैं। बतातीं हैं कि उनकी मां तो बचपन में ही गुजर गईं लेकिन सास व बेटी ने कभी इस कमी को अखरने नहीं दिया। वर्ष 1994 में रींवा से एमबीबीएस करने के दो साल बाद वह अचानक ही चित्रकूट पहुंची, यहां की जरूरत व पिछड़ापन देख बस यहीं की सेवा करने का संकल्प बना लिया। चैलेंज स्वीकारा और उसे पूरा भी किया। बेहद सादगी का जीवन व्यतीत करने वाली डॉ. गेहानी का कहना है कि उनकी शादी डा. अनिल आडवानी से होने के बाद उनका नाम डॉ. पूनम आडवानी हो गया। उनकी सास ईश्वरी आडवानी व पति के संबल व भरोसे से अब बेटी विधि आडवानी भी डाक्टरी की पढ़ाई कर रही है। मदर्स-डे पर उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छे संस्कार दीजिए और दबाव न डालकर उन्हें खुद निर्णय लेने दीजिए। 

हर परिस्थिति से सामंजस्य बना निभाती हैं जिम्मेदारी
चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक आईपीएस अंकित मित्तल की पत्नी डॉ. सौम्या मित्तल को अपनी मां से ही जनसेवा करने की सीख मिली। उनकी मां भी बालरोग विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। संयोग है कि पिता रिटायर्ड आइपीएस अफसर हैं अब पति आईपीएस हैं। इन सबके बावजूद उनका पढ़ाई व जनसेवा का भाव कभी कम नहीं हुआ। 2016 में एमबीबीएस करने के बाद उनकी शादी हुई। इसके बाद भी पढ़ाई जारी रही। इसके बाद उन्होंने एमडी किया। 2018 में एक बेटी अनन्या को जन्म देने के दौरान वह मेरठ में एलोपैथिक चिकित्साधिकारी के रूप में कार्यरत थीं। मदर्स-डे उन्होंने अपनी बेटी के साथ मनाया इसके बाद मरीजों की सेवा में जुट गईं। कोरोना काल में यह कार्य बेहद संजीदगी से करते हुए पति व परिवार को भी महफूज रख रहीं हैं। मदर्स डे पर वह कहतीं हैं कि वह अपनी बेटी को मां से मिली शिक्षा देना चाहतीं हैं। जिससे वह भी आगे चलकर समाज की सेवा कर सके।
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