चित्रकूट। पितृपक्ष की अमावस्या पर अपने पुरखों को जल तर्पण करने के लिए हजारों श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंचे। प्रशासन की रोक के बाद भी श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी नदी में स्नान किया। रामघाट में विधिविधान से अपने पुरखों को जल तर्पण कर कामदगिरि की परिक्रमा की। कोरोना काल में पितृपक्ष अमावस्या पड़ने के बाद भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जल तर्पण कर दान दिया। यूपी व एमपी शासन प्रशासन की टीम ने अमावस्या मेले में आने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
इसके बाद भी हजारों श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंचे। मंदिरों के प्रमुख पट बंद रहे। बाहर से ही श्रद्धालुओं ने दर्शन किया। कुछ स्थानों पर पुलिसकर्मियों से श्रद्धालुओं की नोंकझोंक भी हुई। गाजियाबाद के राजेश सिंह, फतेहपुर के अरुण मिश्र, हमीरपुर के कमलेश कुशवाहा, झांसी के महेश पाल आदि ने बताया कि यह अमावस्या बहुत महत्वपूर्ण है। चित्रकूट मेें पुरखों को जल तर्पण करने से पुण्य मिलता है। कोरोना संक्रमण काल के बाद भी इसके महत्व को देखते हुए वह सब यहां पहुंचे।
जिलाधिकारी शेषमणि पांडेय, एसपी अंकित मित्तल सहित मप्र के मझगवां एसडीएम हेम करण धुर्वे, तहसीलदार ऋषि नारायण सिंह, सीएमओ नगर पंचायत रमाकांत शुुक्ला, प्रभारी नया गांव आरबी त्रिपाठी ने मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर श्रद्धालुओं से घर में ही पूजा करने को कहते रहे।
यूपी एमपी सीमा मेें लगाया बैरिकेटिंग
खोही। मेला स्थल पर यूपी व एमपी प्रशासन की तरफ से आने पर प्रतिबंध लगा होने से दोनों की सीमा स्थित बैरिकेटिंग लगाई कई थी। कई स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहे। इसके बाद भी जंगली रास्तों से होकर श्रद्धालु रामघाट पहुंचे।
किशोरियों ने मनाया महाबुलिया पर्व
चित्रकूट। बुंदेलखंड क्षेत्र में पितृपक्ष माह में महाबुलिया पर्व मनाने की परंपरा सैकड़ों साल से चली आ रही है। इस वर्ष कोरोना काल होने के बाद भी किशोरियों ने इस पर्व को मनाया। जिले में पितृपक्ष के अंतिम दिन परंपरा के अनुसार किशोरियों ने गाजे बाजे के साथ फूलों से सजी महबुलिया को मंदाकिनी व यमुना नदी में विसर्जन किया। संवाद