चित्रकूट। परिषदीय स्कूलों के बच्चे अब शनिवार को धार्मिक स्थलों की सैर करेंगे। इस दिन उन्हें किताबें लेकर स्कूल नहीं आना होगा। साथ ही स्कूलों में पढ़ाई के बजाय खेलकूद, रचनात्मक और अनुभवजन्य गतिविधियों होंगी। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शुरू की है, जिसका उद्देश्य बच्चों को किताबी पढ़ाई से बाहर की दुनिया से जोड़ना और कौशल विकास को बढ़ावा देना है।
शासन की घोषणा के बाद से बच्चों में अलग से खुशी है। सरकार की मंशा है कि छात्रों के मानसिक दबाव को कम किया जाए, अनुभवजन्य ज्ञान प्रदान कर उनको नई अनुभूति का परिचय कराया जाए। साथ ही स्थानीय परिवेश के अनुसार गतिविधियों का चयन, कौशल विकास को बढ़ावा देना है। इसके लिए आनंदम नामक सुझाव पुस्तिका विकसित की गई है, जिसके आधार पर गतिविधियां संचालित होंगी। इससे छात्र-छात्राओं में मानसिक दबाव कम होगा। बच्चे एक दिन अच्छे मन से स्कूल जाएंगे और अपने कौशल को प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रदर्शित करेंगे।
बीएसए बीके शर्मा ने बताया कि विभागीय आदेश प्राप्त हुआ है। परिषदीय विद्यालयों में बैगलेस डे नियमानुसार मनाया जाएगा। कक्षा छह से आठवीं तक के बच्चों के लिए यह आयोजन किया जाएगा। साथ ही कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय को भी इसमें शामिल किया गया है। उम्मीद है कि यह कदम शिक्षा को और अधिक रोचक और व्यावहारिक बनाएगा।