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चित्रकूटः चरवाहे की हत्या कर शव रेल पटरी किनारे फेंका

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बहिलपुरवा थाना क्षेत्र के रेलवे पटरी के पास मिले चरवाहे के शव की बरामदगी के बाद एकत्र ग्रामीण। - फोटो : CHITRAKUTT
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मानिकपुर/सरैंया (चित्रकूट)। एक सितंबर से लापता चरवाहे का शव रविवार को डेढ़वारा पुरवा के पास रेल पटरी के बगल में संदिग्ध हालात में मिला। उसके चेहरे पर धारदार हथियार से चोट के निशान थे। चोट के निशान देखकर परिजनों ने हत्या कर शव फेंकने का आरोप लगाया और शव गांव ले जाने लगे।
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ग्रामीणों के विरोध की जानकारी पर पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल और चार थानों की पुलिस पहुंची गई। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, पर पोस्टमार्टम के पहले ग्रामीणों शव गांव ले जाने की जिद पर अड़ गए थे। बाद में पुलिस शव को मुख्यालय ले आई।
रविवार को सुबह रेलवे ट्रैक चेक करने निकले कर्मियों को बहिलपुरवा थाना क्षेत्र के डेढ़वारा पुरवा के पास रेलवे डाट पुल की चरपुलिया के पास पटरी किनारे एक रक्तरंजित शव मिला। सिर और चेहरे पर कुल्हाड़ी से वार के निशान हैं। गले में भी काला निशान था। इस पर रेलवे कर्मचारी ने बहिलपुरवा थाने को सूचना दी।
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सूचना पर थाना प्रभारी पंकज पांडेय फोर्स संग मौके पर पहुंचे और शव को ग्रामीणों की मदद से पटरी के पास से हटाकर मैदान में लाकर रखा। आसपास के लोगों ने शव की शिनाख्त मानिकपुर थाना क्षेत्र के बजहापुरवा हनुआ गांव निवासी चरवाहे राजू यादव (22) पुत्र कल्लू के रूप में की। राजू पांच दिन पहले बकरी चराने गया था, इसके बाद से वह लापता हो गया था।
सूचना पर मानिकपुर और सरैंया पुलिस टीम राजू के परिजनों लेकर पहुंची। पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने लगी। इस पर परिजनों और रिश्तेदारों ने विरोध किया और पहले शव गांव ले जाने फिर बाद में पोस्टमार्टम को भेजने की बात कही। इससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
जानकारी पर एसपी अंकित मित्तल मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाया। एसपी से परिजनों ने पुलिस टीम पर भी लापरवाही का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस टीम मौका मिलते ही शव लेकर मुख्यालय आ गई। देर शाम को दो डाक्टरों ने पोस्टमार्टम किया। इस दौरान पोस्टमार्टम हाउस में कई थानों का फोर्स मौजूद था।
बकरियां चराने जंगल गया था
चरवाहा राजू एक सितंबर को गांव के पास स्थित जंगल में बकरियां चराने गया था। वहां से वह घर नहीं लौटा। परिजनों और पुलिस ने खोजबीन की थी, लेकिन सुराग नहीं लगा। उसका एक बकरा मरा मिला था। चरवाहे के कई सामान भी बरामद हुए थे। दो सितंबर को परिजनों ने हत्या की आशंका जता मानिकपुर मार्ग पर जाम लगाया था। आरोप था कि पुलिस टीम चरवाहे की खोज सही तरीके से नहीं कर रही है।
पुलिस से कई बार हुई नोकझोंक
पोस्टमार्टम हाउस में भी पुलिस और ग्रामीणों में नोकझोंक हुई। कई बार पुलिस को लाठियां पटकनी पड़ी। एसपी ने परिजनों को समझाया और लापरवाह पुलिसकर्मियाें के खिलाफ जांच कर कार्रवाई का भी आश्वासन दिया। पुलिस ने भारी सुरक्षा के बीच शव उसके गांव ले जाकर देर शाम अंतिम संस्कार करा दिया। एसपी ने बताया कि परिजनों की तहरीर मिलते ही हत्या की रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
बकरी चोर गैंग पर हत्या का शक
परिजनों संग ग्रामीणों को भी बकरी चोर गैंग पर राजू यादव की हत्या का शक है। क्षेत्र में बकरी चोर गैंग सक्रिय है। बकरी व भेड़ चोर गैंग अक्सर कोई न कोई वारदात करता रहता है। इसी साल दो जनवरी को शहर के पास पुलिस लाइन के पास ही दो भेड़ चरवाहे पिता व पुत्र की हत्या कर भेड़ ले गए थे। बाद में पुलिस ने हत्यारों को गिरफ्तार भी किया था। इसी तरह से बहिलपुरवा मानिकपुर क्षेत्र में भी बकरी चोर गिरोह ने कई घटनाओं को अंजाम दिया है।
कई पार्टियों के नेता परिजनों से मिले
कई पार्टियों के नेता पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचने वालों में सपा जिलाध्यक्ष अनुज यादव, पूर्व विधायक वीर सिंह पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र, हनुआ के पूर्व प्रधान संजय मिश्र, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष पंकज मिश्रा, सपा नेता गुलाब खा, फराज खान आदि थे।
तीन माह में ही श्रीमणि की मांग का सिंदूर उजड़ा
राजू का शव देख उसकी मां बेसनिया देवी, पत्नी श्रीमणि और भाई राकेश दहाड़े मार मारकर रो रहे थे। राजू की तीन पहले ही शादी हुई थी। परिजन श्रीमणि को लगातार सांत्वना दे रहे थे, लेकिन उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। राजू के परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। पिता का कहना था कि जिस दिन राजू लापता हुआ था, उसने खाना भी नहीं खाया था।
बेरहमी से हत्यारों ने राजू को मौत के घाट उतारा
सरैंया/मानिकपुर। परिजनों का कहना था कि राजू को बड़ी बेरहमी से मारा गया। राजू के शरीर की चोटें वीभत्सता की कहानी बयां कर रहीं हैं। शरीर के कई हिस्सों में जलती सिगरेट या बीड़ी से जलाने के निशान भी नजर आ रहे हैं। परिजनों को अंदेशा है कि कुल्हाड़ी या अन्य धारदार हथियार से हत्या की गई है। हत्यारों के एमपी में भागने की भी संभावना जताई जा रही है, क्योंकि जिस स्थान पर राजू का शव मिला, वहां से एमपी की सीमा कुछ ही दूरी पर है।
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