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बदलू की तरह बदलें सोच और आलू की खेती अपनाएं

Mon, 19 Jan 2015 10:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
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जिले की मिट्टी आलू की खेती के लिए मुफीद है। किसानों को इससे बहुत फायदा होगा। उन्हें परंपरागत खेती छोड़कर कुछ नया करना होगा, जिससे अधिक धनोपार्जन हो सकें। जिला उद्यान अधिकारी राकेश कुमार ने किसानों को ये नसीहत दी।
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उन्होंने बताया कि जिले की भूमि बलुआ दोमट है, जो आलू के अनुकूल है। आलू में कम से कम दस गुना फसल होती है और लगभग तीन गुना तक रकम वापस आती है।

उन्होंने सीतापुर ग्रामीण के किसान बदलू प्रसाद का उदाहरण दिया। बताया कि बदलू ने चार नवंबर 2014 को 35 क्विंटल आलू का बीज उद्यान विभाग से 1460 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 50 हजार में रुपये में लिया था। यह ओवरसाइज आलू उन्नत किस्म का हिमांचल प्रदेश का है।

इसकी किस्में कुफरी बहार, कुफरी बादशाह, कुफरी सिंदूरी होती हैं। इसने छह बीघा (एक हेक्टेअर) में इसे लगाया था। उन्होंने बताया कि मार्च में इसकी फसल तैयार होगी। इससे बदलू को सवा लाख का फायदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा तीन साल तक किसान को फिर से बीज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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भंडारण की व्यवस्था न होने से परेशानी
जिला उद्यान अधिकारी ने माना कि किसानों के सामने आलू आदि के भंडारण की व्यवस्था न होने से दिक्कत आती है। वर्तमान ने बांदा में कोल्ड स्टोरेज बन रहा है और पास में फतेहपुर कोल्ड स्टोरेज ही एकमात्र विकल्प है। कोल्ड स्टोरेज के निर्माण में सरकार द्वारा भारी अनुदान दिया जाता है, इसके बाद भी कोई इस ओर रुचि नहीं दिखाता, जो खेदजनक है।

कम से कम छह पानी लगाएं
जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि किसानों को यह भ्रम तोड़ना पड़ेगा कि वह आलू में चना की तरह पानी लगा सकते हैं। जब यह दस गुना ज्यादा फसल देता है तो पानी भी ज्यादा लगाना पड़ेगा। बोने के दस दिन बाद पर्याप्त पानी लगाना होता है। इसके अलावा दस-दस दिन के अंतराल में कम से कम छह बार हल्के पानी की इसको जरूरत होती है। एक माह में प्रति हेक्टेअर के हिसाब से तीन क्विंटल यूरिया डालें। कहा कि किसान किसी भी समस्या के बारे में उनके मोबाइल 8924905845 पर संपर्क कर सकते हैं।
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