खेती में बदलते मौसम और अन्य परिस्थितियों से किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। किसानों को इस मुसीबत से बचाने को केंद्र सरकार योजना बना रही है। मप्र के किसानों ने सिंचाई का ऐसा जाल बिछाया कि पंजाब के बाद अब मप्र को भी अनाज का भंडार कहा जाने लगा है। ये बातें विशिष्ट अतिथि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने मझगवां में आयोजित सराहनीय कार्य करने वाले किसानों के सम्मान समारोह में कहीं।
उन्होंने कहा कि किसान की ही सरकार दिल्ली में बैठी है। किसान समस्या और उनके बोनस को लेकर केंद्र सरकार जो बन पड़े करेगी। इस मौके पर सतना (मप्र) के अंतर्गत आने वाले 17 किसानों को दीनदयाल शोध संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्र मझगवां ने नानाजी देशमुख कृषक अवार्ड से सम्मानित किया।
पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मोहनभाई कल्याण जी भाई कुंदरिया कृषि राज्य मंत्री, गिरिराज सिंह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रम राज्य मंत्री, गणेश सिंह संसदीय सचिव-सांसद सतना, लाल सिंह आर्य नर्मदा घाटी विकास मंत्री मप्र शासन, नारायण सिंह केसरी पूर्व राज्यसभा सदस्य, अनुपम मिश्रा क्षेत्रीय परियोजना निदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिसद जबलपुर और अध्यक्ष शंकर प्रसाद ताम्रकार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीनदयाल शोध संस्थान शामिल रहे।
संगठन सचिव अभय महाजन, महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो नरेश चंद्र गौतम भी उपस्थित रहे। कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. राजेंद्र सिंह नेगी ने पुरस्कार के बारे में बताया। संचालन प्रसार वैज्ञानिक डा. वेदप्रकाश सिंह ने किया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि कृषि के बगैर भारत का विकास संभव नहीं है। शंकर प्रसाद ताम्रकार ने कहा कि नानाजी किसी भी समस्या का हल उसके केंद्र में जाकर निकाला करते थे। हमारे कृषक भाई भी अपने कृषि और आजीविका को लेकर जो भी कठिनाई है उसकी जड़ तक पहुंचकर मुकाबला करें।