फोटो 03 सीकेटीपी-07-रोडवेज बस स्टॉप। संवाद
चित्रकूट। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा की स्थिति कमजोर बनी हुई है। परिवहन निगम द्वारा निजी बस संचालकों से आवेदन मांगे गए थे, लेकिन अपेक्षित रुचि नहीं मिली। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत अब तक केवल तेरह आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। इससे ग्रामीण रूटों को बसों से जोड़ने की स्थिति ठीक नहीं है।
योजना में सीएनजी या इलेक्ट्रिक बसों को प्राथमिकता दी गई है। आवेदन की अंतिम तिथि 28 मार्च निर्धारित थी, जिसे बढ़ाने की उम्मीद है। परिवहन विभाग का मानना है कि जागरूकता की कमी से आवेदन कम आए। अब विभाग जागरूकता अभियान चला रहा है। योजना में बस अधिकतम 10 वर्ष पुरानी होनी चाहिए। आवेदन शुल्क दो हजार रुपये, सिक्योरिटी राशि पांच हजार रुपये और मासिक शुल्क 15 सौ रुपये है। परिवहन अभाव में ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए कठिनाई हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्याप्त बसें न होने से समस्याएं बढ़ेंगी।
ग्रामीण मार्गों पर बदहाल सेवा
जिला मुख्यालय से जुड़े 10 से अधिक ग्रामीण मार्गों पर केवल एक रोडवेज बस चलती है। रानीपुर, शिवराम, सरैया सहित दर्जनों गांवों के हजारों लोगों को नियमित सुविधा नहीं मिलती। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है या वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ता है। बसों की कमी का फायदा डग्गामार वाहन संचालक उठा रहे हैं। ये वाहन मनमाना किराया वसूलते हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है।
डिपो में ईंधन सुविधा का अभाव
रोडवेज डिपो परिसर में पेट्रोल पंप न होने से नई बसों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। परिवहन निगम चाहकर भी पर्याप्त बसें संचालित नहीं कर पा रहा है। सीमित संसाधनों के सहारे ही व्यवस्था चल रही है। एआरएम एलके त्रिवेदी ने बताया कि पंप निर्माण को लेकर मुख्यालय से बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि तिथि बढ़ने पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।