मानिकपुर विधानसभा सीट ब्राह्मण बहुल होने के बाद भी भाजपा ने यहां से पिछडे़ वर्ग से प्रत्याशी उतार कर तगड़ा जोखिम उठाया है। दस्यु प्रभावित इस सीट से पहले से बसपा व सपा ने भी पिछडे़ वर्ग का ही प्रत्याशी मैदान में है। यह अभी देखने वाली बात है कि सपा व कांग्रेस के गठबंधन के बाद सपा ने अपने पूर्व घोषित प्रत्याशी को हटाकर कांग्रेस को सीट दी तो मुकाबला बेहद दिलचस्प भी हो जाएगा। माना जा रहा कि यदि कोई मजबूत ब्राह्मण प्रत्याशी मैदान में आ गया तो भाजपा व बसपा को अतिरिक्त ताकत लगानी पड़ेगी।
आजादी के बाद से मानिकपुर सीट सुरक्षित घोषित रही है। पिछले चुनाव 2012 मेें यह सीट सामान्य हो गई थी। जिसमें बसपा के प्रत्याशी चंद्रभान पटेल को मैदान में उतारा गया था उन्होेंने सपा के श्यामाचरण गुप्त और भाजपा की पुष्पा मिश्रा को हराया था। बसपा ने इस बार उनको फिर से प्रत्याशी बनाया है। वही भाजपा ने उन्हीं के स्वजातीय उम्मीदवार पूर्व मंत्री आर के सिंह पटेल को मैदान में उतारा है।
सपा ने भी पहले इसी सीट से दो लिस्ट में डा. निर्भय पटेल को प्रत्याशी बनाया है। इसके बाद तीसरी लिस्ट में फिलहाल मानिकपुर का नाम अभी नहीं है। जिससे अभी तक सपा व कांग्रेस के प्रत्याशी को लेकर संशय बना है कि यहां पर कौन प्रत्याशी मैदान में उतरा जाएगा।
इस सीट का जातीय समीकरण (अनुमान) ब्राह्मण 80 हजार ,अनुसूचित जाति 35 हजार ,कोल 40 हजार ,यादव 25 हजार, कुर्मी 15 हजार , वैश्य 15 हजार बताया गया है। लोगों का कहना है कि कांग्रेस का प्रत्याशी यदि यहां से खड़ा हुआ तो मुकाबला दिलचस्प होगा। प्रथम दृष्टि में यह भी माना जा रहा है कि भाजपा के प्रत्याशी को स्वजातीय के अलावा भाजपा वोट बैंक से लाभ मिलेगा। जातीय आंकड़ों से ही इस सीट पर जीत हार का फैसला होता रहा है उस आंकड़े में एक ही बिरादरी के प्रत्याशी मैदान में आने से चुनाव दिलचस्प हो गया है।