चित्रकूट। कोषागार में हुए 43.13 करोड़ के घोटाले में डिजिटल हस्ताक्षर व एप में भुगतान फारवर्ड में जमकर दुरुपयोग हुए। एसआईटी की जांच में भुगतान में दुरुपयोग तरीकों का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि नामजद विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों ने इस तकनीक के जरिए ही सबको धोखे में रखा। विभाग के तीन अन्य लेखाकारों पर संदेह बढ़ा तो पूछताछ में से एक ने बताया कि वह 7 दिन की छुटटी पर था। इसी बीच उसका डिजिटल हस्ताक्षर इन नामजदों के साथ अन्य ने मिलकर हैक कर लिया और उसके हस्ताक्षर से तीन करोड़ का भुगतान ऑनलाइन शो कर रहा है।
शनिवार को मामले की जांच में एसआईटी ने संदेह के घेरे में आए तीनों लेखाकार योगेंद्र सिंह, राजबहादुर व राजेश कुमार से पूछताछ की। तीन घंटे से अधिक समय तक चली पूछताछ में तीनों डरे व सहमे नजर आए। पूछताछ में सभी से डिजिटल हस्ताक्षर व इनके पटल के एप संचालन से भुगतान की जानकारी की। इन लेखाकारों में कुल मिलाकर नौ करोड़ का भुगतान पाया। इसे लेकर हुए सवालों पर लेखाकारों ने बताया कि कुछ मामले की उन्हें जानकारी नहीं है, लेकिन ज्यादातर भुगतान ऑनलाइन सारे कागजात पूरे होने के बाद आगे बढ़ाए गए हैं।
लंबी पूछताछ के दौरान लेखाकार योगेंद्र सिंह ने रहस्योघाटन किया। बताया कि वह परिवार के एक सदस्य के इलाज के लिए एक सप्ताह के लिए जिले से बाहर अवकाश लेकर गए थे। इस दौरान उसके डिजिटल हस्ताक्षर को हैक किया गया। उसके पटल से लगभग तीन करोड़ का भुगतान एप में शो कर रहा है। बताया कि अवकाश से लौटने के बाद जब उच्चाधिकारियों से इस मामले में वार्ता की गई तो जिम्मेदार एटीओ व अन्य ने बताया गया कि कोई गलत भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे में वह आगे कुछ नहीं कर सका। एसआईटी प्रभारी अरविंद वर्मा व जांच अधिकारी अजीत पांडेय ने बताया कि पूछताछ तो सभी से चल रही है। तीनों लेखाकार के अलग अलग बयान लिए गए हैं। इसमें कई नई चीजें सामने आई हैं।
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संपत्ति की जांच प्रक्रिया जारी मगर नहीं मिल रहा रिकार्ड
चित्रकूट। कई पेंशनर व बिचौलियों के बैंक खाते से यह तो स्पष्ट हो गया कि है कुछ मृतक के खाते संचालित हैं। कुछ मृतकों के खाते नंबर का संचालन बिचौलिए कोषागार विभाग के कुछ अधिकारी व कर्मचारियों से मिलकर कर रहे हैं। इसमें करोड़ों का खेल हो रहा था। 2018 से लेकर 2025 तक चले इस घपलेबाजी में नामजद 99 लोगों की संपत्ति का ब्यौरा एसआईटी ने मांगा है। डीएम पुलकित गर्ग ने भी रजिस्ट्रार को आदेशित किया है कि नामजद आरोपियों की चल व अचल संपत्ति की बिक्री पर रोक लगाएं। साथ ही उसका विवरण भी दें। आठ दिन बाद भी किसी ने अपनी पूरी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है। दस पेंशनर व बिचौलियों की संपत्ति एसआईटी ने चिह्नित की है, लेकिन इसे अधूरी माना गया है। एसआईटी ने इसके लिए नोटिस भी जारी की है। जांच अधिकारियों ने बताया कि अभी संपत्ति का पूरा ब्योरा किसी का नहीं मिला है।
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पुलिस का नहीं वन विभाग का दरोगा
चित्रकूट। पेंशन घोटाला मामले में रिटायर्ड दरोगा नांदीतौरा निवासी नत्थूराम यादव का नाम आने पर पुलिस विभाग में भी शनिवार को कानाफूंसी होती रही। उसके खाते में 98 लाख रुपये होने की बात आई। इस मामले में अपर एसपी सत्यपाल सिंह ने बताया कि इसे लेकर कई जगह पूछताछ की गई तब पता चला कि यह पेंशनर पुलिस विभाग नहीं, बल्कि वन विभाग का रिटायर्ड दरोगा है। (संवाद)