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भोले कष्ट हरते

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चर के  प्राचीन सोमनाथ मंदिर में सावन के महीने में आस्थावानों की भीड़ रहती है। मान्यता है कि यहां भक्तों की हर मुराद पूरी होती है। भोलेनाथ भक्तों के सारे कष्ट हर लेते हैं। लोग सावन में यहां भंडारा भी करते हैं।
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मुख्यालय से ऐंचवारा जाने वाले मार्ग से इस प्राचीन मंदिर में पहुंचा जा सकता है। कुछ दूरी तक रास्ता ठीक है जो चर गांव पहुंचता है। इसके अलावा एक दूसरा रास्ता भी है जो कर्वी-मानिकपुर मार्ग पर मालिन टंकी से मदना गांव संपर्क मार्ग से सीधे सोमनाथ मंदिर की ओर जाता है। पाषाण कला का अप्रतिम उदाहरण सोमनाथ मंदिर एक छोटी वृत्ताकार पहाड़ी पर बना है।

 मंदिर जाने वाली सीढ़ियों के पास ही लाल बलुए पत्थर में बनी मुगदरधारी योद्धा और नृत्य गणेश की मूर्तियां शिल्पकला की बारीकियां प्रदर्शित करती हैं। यहां हर सोमवार को भक्त भगवान शिव की पूजा अर्चना को पहुंचते हैं। सावन में यहां पूजा का विशेष महत्व है। दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं और शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। मनौती पूरी होने पर बड़ी संख्या में भंडारा भी कराते हैं।    
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पुरातत्व विभाग के संरक्षण में भी विकास नहीं
देखरेख के अभाव में मंदिर का काफी हिस्सा गिर चुका है। मंदिर से गणेश, शिव-पार्वती, अर्धनारीश्वर एवं कार्तिकेय की प्रतिमाओं के अलावा विभिन्न प्रकार के शिवलिंग प्राप्त हुए। मंदिर में गर्भगृह के मुख्य द्वार पर गंगा एवं यमुना नदियों को अंकित किया गया है, जो नागवंशी शासकों के स्थापत्य का प्रतीक हुआ करता था। अष्टकोणीय मंडप की छत गिर चुकी है। गुंबदों में अप्सराओं की मूर्तियां स्थापित हैं।

मंडप के आगे गर्भगृह है, जहां शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के पीछे बह रही वाल्मीकि नदी यहां के दृश्य को और सुरम्य बनाती है। यह नदी आगे चलकर वारुणि नदी में मिल जाती है। मंदिर की देखरेख का जिम्मा पुजारी रामकृष्ण दास के पास है। उन्होंने बताया कि मंदिर चंदेलकालीन है। यहां पानी के लिए दो हैंडपंप हैं और इनमें से भी एक खराब है। उन्होंने बताया कि पूर्व जिलाधिकारी बलकार सिंह ने यहां के लिए काफी काम किया था। इसके बाद किसी ने ध्यान नहीं दिया। पुरातत्व विभाग के संरक्षण में होने के बाद भी इसका विकास नहीं हो रहा।

गौरवशाली है मंदिर का इतिहास
पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार शिवभक्त राजा, शासक या धर्मभीरु लोग अपने नाम के साथ नाथ या ईश्वर जोड़कर शिवमंदिर का निर्माण कराया करते थे। सोमनाथ का नाम गुजरात के प्रभासपत्तन नामक स्थान पर चालुक्य शासकों द्वारा बनवाए गए सोमनाथ मंदिर से जुड़ा है। पाठा की दुर्गम विंध्य शृंखलाओं के बीच सोमनाथ मंदिर निश्चित रूप से एक तीर्थस्थल और पयर्टन के क्षेत्र में धरोहर माना जा सकता है।
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