बेटे के छूटकर आने की जानकारी पर उसे लेने घर के बाहर आते सपा नेता संतू सिंह (सफेद कुर्ते में)।
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दो दिन बाद रेलवे गेटमैन और सपा नेता का पुत्र डकैतों के चंगुल से छूटकर सकुशल घर पहुंच गए। दोनों के परिजनों की आंखें खुशी के आंसू से छलक उठीं। पुलिस का दावा है कि भारी दबाव के चलते मजबूर होकर डकैतों ने दोनों को छोड़ने में ही भलाई समझी लेकिन चर्चा है कि आखिर में 12 लाख रुपये पहुंचाने के बाद दोनों की रिहाई हुई है।
रविवार रात करीब 12 बजे मानिकपुर निवासी सपा नेता निर्भय सिंह उर्फ संतू सतना से लौट रहे थे, टिकरिया रेल फाटक के पास पांच लाख तीस हजार के इनामी डाकू बबुली कोल गैंग ने उनके पुत्र विजय और रेलवे फाटक के पास मौजूद गेटमैन बलवंत बहादुर का अपहरण कर लिया था। डकैतों ने सपा नेता से 50 और गेटमैन के परिवार से पांच लाख की फिरौती मांगी थी। इसके बाद से पूरा पुलिस अमला अलर्ट हो गया और दोनों की रिहाई के प्रयास शुरू कर दिए।
सोमवार शाम को ही डकैतों के चंगुल से दोनों छूट गए थे लेकिन लंबा जंगल का सफर पूरा करने में दोनों को देर रात हो गई। मंगलवार तड़के करीब तीन बजे दोनों अपहृत विजय सिंह व बलवंत मानिकपुर पहुंचे तो उन्हें देखकर परिजनों की खुशी का ठिकाना न रहा। दोनों परिजनों से लिपट गए। कुछ देर बाद ही पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेंद्र सिंह, अपर एसपी बलवंत चौधरी, आरपीएफ सतना के कमांडेंट अनिल भालेराव और सहायक कमांडेंट केसी मुदिलयार सपा नेता के घर पहुंचे।
सभी ने पुलिस के प्रयास की सराहना की। सपा नेता ने कहा कि पुलिस के भारी दबाव के चलते रिहाई हुई है। इसी दौरान मोहल्ले के कई लोगाें ने बताया कि 50 लाख के बाद डकैतों ने कई बार फोन कर फिरौती की रकम घटाने पर राजी हुए। इसमें 10 लाख सपा नेता और दो लाख रेलवे गेटमैन के परिजनों ने देकर दोनों की जान बचाई है। अपर एसपी ने कहा कि पुलिस का ही दबाव था, तभी डकैत दोनों को छोड़कर भाग गए हैं।