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चार और बंदीरक्षकों की भूमिका संदिग्ध, जांच में नाम आये सामने

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चित्रकूट। जिला जेल में चार बंदी रक्षकों की भूमिका संदिग्ध मिली है। जांच के दौरान बंदियों से हुई पूछताछ में यह नाम सामने आए हैं। इन सभी पर जेल प्रशासन की मेहरबानी थी। चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति होती थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें एक बंदीरक्षक का वाहन बैरक के पास तक बेरोकटोक जाता था। जांच अधिकारियों ने इन चारों बंदीरक्षकों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की और बयान दर्ज किए हैं। इसमें से एक की ड्यूटी 13 मई की शाम छह बजे से 14 मई की सुबह दस बजे हाई सिक्योरिटी बैरक के आस पास ही थी।
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जांच टीम के साथ पहुंचे कई अधिकारियों को कुछ बंदियों ने बताया कि 13 मई की शाम छह बजे से 14 की सुबह दस बजे तक एक बंदी रक्षक राजीव शर्मा की ड्यूटी इसी बैरक के आसपास थी। इसके अलावा जेल के बंदीरक्षक काशी प्रसाद, अनिल कुमार व जगदीश प्रसाद का भी दबदबा था। चारों बंदी रक्षकों पर जेल अफसरों की खास मेहरबानी रहती थी। यह सब मनमाने तरीके से जेल परिसर में आते जाते थे इनकी जांच नहीं होती थी और जिसमें राजीव नाम बंदीरक्षक तो वाहन तक बैरक तक ले आता था। महीने में कई दिन ड्यूटी से गायब भी रहता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस बंदी रक्षक की मनमानी व अभद्रता करने के खिलाफ लगभग 40 बंदियों ने इसी माह के पहले सप्ताह में जेल अधीक्षक व जेलर से शिकायत की थी। जिस पर दोनों अफसरों ने जल्द ही कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। सूत्रों की मानें तो जांच रिपोर्ट में इस घटना और पूरी शिकायत का जिक्र किया गया है और इन चारों बंदी रक्षकों से भी पूछताछ कर बयान लिए गये हैं। इन सभी के बयानों में कई असमानताएं भी हैं।
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इनसेट
कैमरे बनाने का काम जारी
चित्रकूट। इधर रविवार को भी जेल परिसर में सीसीटीवी कैमरे बनाने वाली संस्था के कर्मचारी काम करते रहे। रविवार होने के कारण सिर्फ दो इंजीनियर ही मौजूद रहे जिससे सिर्फ दो और कैमरे सही हो सके हैं। इस प्रकार जेल परिसर के सात खराब कैमरे सही हो चुके हैं।
क्या है मामला
14 मई शुक्रवार को जिला जेल में माफिया मुख्तार अंसारी गैंग के शार्प शूटर बंदी अंशू दीक्षित के पास न जाने कहां से विदेशी पिस्टल पहुंची थी और उसने कुख्यात अपराधी आइसोलेट बैरक में बंद मुकीम काला और अपने ही बैरक में बंद माफिया मुख्तार अंसारी के रिश्तेदार अपराधी मेराज अली की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी थी। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां आकर मुठभेड़ कर अंशू को भी मौत के घाट उतार दिया था। देश भर में इस घटना की चर्चा हुई कि आखिर जेल में इतना बडा कांड कैसे हो गया। इसकी चार अलग अलग स्तर से जांच हो रही है। मामले में जेल अधीक्षक श्रीप्रकाश त्रिपाठी, जेलर महेंद्र पाल, बंदीरक्षक संजय खरे, बंदीरक्षक हरीमोहन राम व पीएसी जवान अमित कुमार निलंबित किये जा चुके हैं। डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने लगातार छह दिन रहकर पूरी जांच की और जांच की प्रथम किश्त पूरी होने पर रिपोर्ट लेकर लखनऊ गये हैं। इसके अलावा न्यायिक जांच, मानवाधिकार आयोग की टीम की जांच व पुलिस टीम की विवेचना चल रही है।
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