चित्रकूट। आवासीय भूमि को पहले धोखाधड़ी कर कृषि योग्य दिखा कर पौने सत्तरह लाख रुपये से ज्यादा के स्टांप व निबंधन शुल्क का सरकार को चूना लगाया। फिर खरीदार ने इसे आवासीय भूमि बनाकर प्लाटिंग की। इसकी शिकायत कर रहे भाजपा नेता को एक साल का समय लग गया। जांच में आरोप सही पाए गए तो पहले सहायक आयुक्त (स्टांप) राम सुंदर यादव को स्टांप शुल्क चोरी में दोषी मानकर मंडलायुक्त अजीत कुमार ने हटा दिया है। साथ ही जमीन खरीदार को पूरा शुल्क जमा करने का आदेश भी हुआ है।
भाजपा के पूर्व महामंत्री विकास मिश्र ने बताया कि राजापुर कस्बे में लूप लाइन से लेकर यमुना पुल की ओर की लगभग एक बीघे की आवासीय भूमि को स्थानीय बजरंग एसोसिएट ने खरीदा। आरोप लगाया कि इसे खरीदारों ने सांठगांठ कर कृषि भूमि दिखाकर 16 लाख 86 हजार 310 रुपये की स्टांप व निबंधन शुल्क की चोरी की है।
बताया कि वह लगातार 2024 से इसकी शिकायत डीएम से लेकर उच्चाधिकारियों को कर रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही थी। नौ मई 2025 को सीएम योगी से मिले और मामले की जानकारी देकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। इसमें यह भी मांग की थी कि जिले के बाहर के अधिकारियों से जांच कराई जाए। इस पर सीएम कार्यालय के निर्देश पर मंडलायुक्त अजीत कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई।
मंडलायुक्त ने फैजाबाद के आयुक्त स्टांप राधाकृष्ण मिश्रा समेत दो सदस्यीय टीम गठित की थी। जांच रिपोर्ट में 16 लाख 86 हजार 310 रुपये की स्टांप व निबंधन शुल्क की चोरी पाई गई। इसके बाद मंडलायुक्त के निर्देश पर एडीएम वित्त एवं राजस्व उमेश चंद्र निगम ने बताया कि मामले में शासन स्तर से रामसुंदर यादव को हटाकर राजस्व परिषद प्रयागराज से संबद्ध कर दिया गया है। इसी मामले में बजरंग एसोसिएट द्वारा खरीदी गई भूमि पर बकाया राजस्व जमा करने के भी निर्देश हुए हैं।