पॉलीथिन के टेंट के नीचे गुजारा करते ग्रामीण और बारिश के बाद टूटा पड़ा किसान का घर।
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बाढ़ प्रभावित मवईकला गांव में यमुना के कहर से एक दर्जन से अधिक मकानों को छति पहुंची है। जिसमें से दो मकान पूरी तरह गिर जाने पर परिवार के सदस्य टेंट के नीचे रह रहे है। अन्य प्रभावित लोग बाढ़ कम होने पर टूटी दीवारें खड़ी कर अपने मकानों में ही रहने लगे हैं। लेकिन उन्हें भी जर्जर मकान गिरने का डर लगा रहता है। प्रशासन ने प्रभावितों को भोजन, वस्त्र आदि की मदद जरूर की है लेकिन यह पर्याप्त साबित नहीं हो रही है।
अगस्त में हुई जोरदार बारिश से यमुना में आई बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित मवईकला गांव रहा। गांव के अंदर तक पानी घुस जाने से एक दर्जन मकानों को छति पहुंची थी। 47 परिवारों को नाव से गांव के बाहर स्कूल में लाकर विस्थापित किया गया था।
पानी कम होने के बाद प्रशासन ने परिवारों को जरूरी भोजन व अन्य सामग्री देकर गांव भेजा था। कई परिवार टूटे मकानों की दीवारें खड़ी कर रहने लगे लेकिन मइयादीन व रवि पुत्रगण माधव और लूलू व फुस्सू पुत्रगण रामचंद्र बच्चों सहित गांव में ही पन्नी के टेंट के नीचे रह रहें है। परिवार के सदस्य मजदूरी कर बच्चों का पेट भर रहे हैं।
माधव व रामचंद्र के परिजनों का कहना है कि बाढ़ के कारण घर में अनाज भी नहीं है। पेट पालने के लिए मजदूरी का ही सहारा है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सभी को प्रशासन से मदद की दरकार है।
बाढ़ से प्रभावित गांव मवईकला में गंदगी जमा है। गलियों में कीचड़ होने से ग्रामीणों को घरों से निकलने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों को गंदगी से संक्रामक रोग फैलने का डर सता रहा है।