दैवी आपदा से किसान टूट गया है। थोड़ी बहुत बुवाई के बाद जो फसल तैयार होने की उम्मीद है उसे अन्ना मवेशियों से बचाना मुश्किल हो रहा है। वहीं अन्ना मवेशियों के बाद अब बंदर भी खेत तक पहुंच गए हैं। मवेशियों के साथ अब बंदरों से फसल बचाने के लिए किसान खेत पर ही दिन रात बिताने को मजबूर है। किसान अब तो बातचीत में कहने लगे हैं कि धरती पर उनके लिए दो और दुश्मन तैयार हो गए हैं। उनसे अपनी फसल बचाने के लिए दिनरात खेतों की रखवाली करनी पड़ रही हैं।
लगातार तीन वर्षों से सूखे की मार झेल रहे जिले के किसानों के लिए खरीफ व रबी की फसल से इस बार भी कोई खास उम्मीद नहीं है। बारिश न होने से हजारों एकड़ की भूमि पर जोताई तक नहीं हो सकी है। पानी की कमी से किसान परेशान है। तराई क्षेत्र या जहां पानी की व्यवस्था हैं वहां सिंचाई होने से जिन खेतों में थोड़ी बहुत फसल तैयार हो गई।
उसे बचाने के लिए किसान दिन रात जुगत में लगा है। वहीं सूखे के कारण मवेशी भी खेतों में भटक रहे हैं। खुद के खाने की व्यवस्था न होने के कारण किसान परिवारों ने मवेशियों को अन्ना छोड़ दिया हैं। भूखे पेट घूम रहे मवेशी अपना पेट भरने के लिए जिस खेत में मौका मिलता है पेट भर लेते हैं।
जिन खेतों में हरी फसल दिखती हैं वहां मवेशी घुस जाते हैं। भरतकूप, शिवरामपुर व सीतापुर क्षेत्र के किसानों के लिए मवेशियों के साथ अब बंदर भी सिरदर्द बन गए हैं। खेतों में आकर बंदर बची फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस मामले में जिलाधिकारी नीलम अहलावत ने बताया कि अन्ना मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए गौशालाओं में व्यवस्था की गई है।
किसान अपने मवेशियों को खुला छोड़ने के बजाए उन स्थानों पर रख सकते हैं। खेतों की रखवाली तो किसानों को करनी होगी। प्रशासन अन्ना मवेशियों से फसल के नुकसान को बचाने के लिए प्रयासरत हैं। मवेशियों के लिए भूसे की व्यवस्था की जा रही है।