धर्मनगरी में संत मोरारी बापू की श्रीराम कथा संगीतमय चौपाइयों और रामधुन के साथ शुरू हुई। भगवान राम के साथ मां मंदाकिनी का विशेष उल्लेख कर बापू ने कहा कि आज के जमाने में भाई भरत के चरित्र का अनुकरण अनिवार्य है। सभी उनके चरित्र को ध्यान में रख कर मनन करें।
डीआरआई के उद्यमिता विद्यापीठ परिसर के विशाल पंडाल में शनिवार को मोरारी बापू ने कहा कि सबका स्नेह मुझे एक बार फिर चित्रकूट खींच लाया है। चित्रकूट की यात्रा पर निकला तो सोच रहा था कि कथा का विषय क्या रहे। फिर मंदाकिनी में स्नान करते समय मन में भाव उठा कि इस नौ दिवसीय रामकथा का विषय चित्रकूट के अनुसार भरतजी का होना चाहिए।
भरत चरित तो आधार है। गुरु कृपा, संतों के आशीर्वाद से जो कुछ अन्त:करण की प्रवृत्ति बनी उसके मुताबिक हम और आप भरतजी को चित्त में रख कर उनके जीवन का दर्शन करें। उन्होंने भक्तजनों से कहा कि जीवन में भगवान के आचरण के विभिन्न रूपों को व्यवहार में लाए, क्योंकि इष्टदेव के चरित्र का अनुकरण एवं अनुसरण करना ही वास्तविक भक्ति है।
आप चाहे योग करे, चाहे ध्यान करें, वैराग्य ले या फि र कोई अन्य कार्य करें लेकिन यदि आप भावपूर्ण तुलसी की कथा का पाठ करे तो आपको ये सभी मिल जाएंगे। कथा से पूर्व सियाराम कुटीर पहुंचकर मोरारी बापू ने नानाजी देशमुख को किया श्रद्धासुमन अर्पित किया।
इसके पूर्व कुछ देर तक उन्होंने नानाजी के कक्ष में रह कर अपनी पुरानी यादों को ताजा किया। इस दौरान डीआरआई के संगठन सचिव अभय महाजन ने बापू को शॉल व श्रीफ ल देकर अभिनंदन किया गया।
रामकथा के शुभारंभ के दौरान पंजाबी भगवान आश्रम के महंत राजकुमार दास, सांसद भैरो प्रसाद मिश्रा, सतना कलेक्टर राजेश पाल, महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम, सद्गुरु सेवा संघ के ट्र्रस्टी डा. बीके जैन, विकलांग विश्व विद्यालय के कुलपति योगेश चंद्र दुबे, सचिव डा. अशोक पांडेय, वरिष्ठ कार्यकर्ता बसंत पंडित, बनारस के उद्योगपति कृष्ण कुमार जालान, अखिलेश खेमका, डा. अनिल जायसवाल, ओमप्रकाश त्रिपाठी, व्यापार मंडल अध्यक्ष पंकज अग्रवाल, हनुमान सिंह जाखेड़ा, संतोष आदि मौजूद रहे।