अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। धर्मनगरी में जल्द ही हवाई जहाज की यात्रा सुगम होने वाली है। सपा शासनकाल में स्वीकृत हवाई पट्टी के रास्ते में आने वाली बाधाएं समाप्त हो रहीं हैं। उम्मीद है कि जल्द इस क्षेत्र में हवाई जहाज उड़ेगा। तीर्थयात्रियों को धर्मनगरी तक पहुंचाने के लिए शहर के पास बन रही देवांगना हवाई पट्टी पर वन विभाग से एनओसी मिल गई है। हवाई पट्टी से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण किया जा रहा है। हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की प्रक्र्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया करने के निर्देश प्रदेश के नागरिक उड्डयन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने दिया है।
चित्रकूट तीर्थ स्थान को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए 2013 में डेढ़ किलोमीटर हवाई पट्टी का निर्माण किया गया था। इसमें कुछ निजी विमान ही उतर सकते थे। इसके बाद 2015 में 92.66 करोड़ रुपये से साढे़ तीन किलोमीटर की नई हवाई पट्टी बनाने को हरी झंडी मिली। इसके लिए 48 करोड़ रुपये जारी किए गए। वन विभाग की तरफ से अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने के कारण 2017 से काम ठप हो गया था।
जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर की पहल पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने एनओसी देने के लिए तैयार हो गया है। इसके लिए उड्डयन विभाग से पांच लाख 68 लाख रुपये जमा कराने के लिए कहा गया है। अब प्रदेश सरकार ने रीजनल कनेक्टिविटी स्क्रीम आरसीएस में चयनित हवाई पट्टियों को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने जा रही है। इसके लिए उड्डयन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी चित्रकूट हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने के लिए टेंडर जारी करने के निर्देश दिए हैं। हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने के लिए रिजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत केंद्र सरकार 100 करोड़ रुपये देगी।
हवाई पट्टी से जुडे़ंगे तीर्थ स्थल
देवांगना हवाई पट्टी को प्रयाग, वाराणसी, लखनऊ हवाई अड्डो से सीधे जोड़ने की तैयारी शुरू की जा चुकी है। डीएम विशाख जी अय्यर ने बताया कि हवाई पट्टी के बनने से चित्रकूट क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। आवागमन सुगम होने से इस क्षेत्र का विकास होगा।