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Chitrakoot News: लंबी बहस व बैठकों के दौर के बाद माने ग्रामीण

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राजापुर/मानिकपुर/मऊ (चित्रकूट) जिले के दो स्थानों पर स्थानीय समस्याओं का समाधान न होने से मतदाताओं ने आक्रोश जताकर मतदान का बहिष्कार किया। दोनों मामले मऊ मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र के रहे। अधिकारियों ने मौके पर जाकर ग्रामीणों को समझाकर मतदान कराया। इसके बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
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कंपोजिट विद्यालय बरूआ के बूथ नंबर 48 में कुल 1134 मतदाता हैं। सवेरे सात बजे से वोटिंग शुरू हुई। साढ़े आठ बजे तक महज 14 वोट पड़े। इसके बाद ग्रामीण एकत्र होकर वोट न डालने का मन बना लिया। यहां तक कि ग्राम प्रधान ने भी वोट नहीं डाला। इसकी भनक लगते ही एसडीएम प्रमोद कुमार झा, सीओ निष्ठा उपाध्याय, जोनल व सेक्टर मजिस्ट्रेट सहित पुलिस बल पहुंच गया। सूचना पर जिला पंचायत अध्यक्ष अशोक जाटव, नगर पालिका अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता समेत बसपा कोआर्डिनेटर कौशलेन्द्र सिंह आदि पहुंच गए। ग्रामीणों को समझाते रहे, लेकिन मतदाताओं ने वोट डालना शुरू नहीं किया तो प्रशासनिक अमला और नेता वापस चले आए।
इसके बाद एडीएम उमेश चंद्र पहुंचे और ग्रामीणों की समस्याएं सुनी। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार जर्जर सड़क बनवाने की मांग प्रशासन से कर चुके है, लेकिन कोई निदान नहीं हुआ। एडीएम ने आश्वासन दिया कि दो दिन बाद सड़क पर लेबलिंग का कार्य शुरू होगा। तब कहीं जाकर ग्रामीणों ने करीब सवा तीन बजे मतदान शुरू किया।
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इसके अलावा इटवा गांव में मतदाताओं ने पंचायत भवन छोटी पाटिन व बडी पाटिन में अलग अलग बनवाने की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों गांव के लोगों को दूर जाने से परेशानी होती है। एसडीएम पंकज वर्मा व थाना प्रभारी रीता सिंह ने पहुंचकर ग्रामीणों को समझाकर बहिष्कार शुरु कराया। लगभग एक घंटे बाद मतदान शुरु हो गया।

इनसेट
आठ किलोमीटर सड़क खराब होने से परेशानी
मऊ/राजापुर/ मानिकपुर। राजापुर तहसील क्षेत्र के बरुआ गांव के ग्रामीण रजुलिया सिंह, विपिन सिंह आदि ने बताया कि लगभग 8 किमी सड़क खराब होने के चलते आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बारिश होने पर बाइक व अन्य वाहनों से निकलना टेढ़ी खीर हो जाती है। सडक़ में फिसलन होने से लोग गिरकर चुटहिल होते हैं। बारिश के मौसम में एम्बुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती। यह समस्या कई वर्षो से बनी है। कई बार बीमार ग्रामीणों की मौत भी रास्ते में हो चुकी है। बार-बार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद कोई निदान नहीं हुआ।
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