फोटो 21सीकेटीपी 45 अधिवेशन में बोलते वक्ता। संवाद
चित्रकूट। भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद द्वारा प्रायोजित दर्शन परिषद का 40वां अधिवेशन व भारतीय बौद्ध शोध संस्थान की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी भी सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। यह आयोजन तीन दिन तक चला। अधिवेशन के अंतिम दिन सुबह के सत्र में लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ प्रशांत शुक्ल ने अध्यक्षता की। इस सत्र में कुल नौ शोध पत्रों का वाचन हुआ।
समापन सत्र के विशिष्ट अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. बृजभूषण ओझा रहे। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा की भारतीय दृष्टि से व्याख्या की। उन्होंने वर्तमान संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता स्पष्ट की। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पांडेय ने समापन सत्र की अध्यक्षता की। कहा कि विभिन्न विचार गंगा की भांति दर्शन को समृद्ध करते हैं। शास्त्र परंपरा नयापन लाती है। डॉ. प्रशांत शुक्ल ने कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।
भारतीय विश्वविद्यालय संघ के संयुक्त सचिव आलोक कुमार मिश्र ने दर्शनशास्त्र को वर्तमान युग की अनिश्चितता का समाधान बताया। उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में दर्शन परिषद के एक विशिष्ट केंद्र के निर्माण का प्रयास करने का आश्वासन भी दिया। दर्शन परिषद के अध्यक्ष प्रो. एचएस उपाध्याय ने सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। अंत में दर्शन परिषद के महासचिव ने सभी का आभार जताया।