बैंक गेट पर लटका नो कैश का बोर्ड
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नोट बंदी के आदेश का एक माह बीत गया। इसके बाद भी बैंकों से लोगों को मन मुताबिक कैश नहीं मिल पा रहा है। जिससे बैंकों व कुछ संचालित एटीएम में सुबह से लंबी लाइनें लगी रहती हैं। अभी भी ग्रामीण के साथ शहरी क्षेत्र के कई बैंकों ने गेट पर नो कै श की नोटिस चस्पा कर रखी है। हालत यह है कि इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंकों की कुल 41 शाखाओं में से 24 शाखा प्रबंधकों ने हाथ खडे़ कर दिए। महज 17 शाखाओं में गुरुवार को दोपहर तक एक-दो हजार रुपये ही बांटे गए।
केंद्र सरकार की ओर से जब नोट बंदी की घोषणा की गई थी तो कहा गया था कि एक माह में व्यवस्था सुधर जाएगी। लोगों ने लंबी कतारों में धक्के खाते हुए किसी तरह से पुराने नोट तो जमा कर दिये लेकिन जब नोट निकालने की बारी आयी तो बैंकों से लोगों को कैश नहीं मिल रहा है।
एक माह से दो से तीन हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। जिससे घर खर्च और कृषि का काम नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की हालत ज्यादा खराब है। इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक पीके पात्रा ने बताया कि कानपुर कार्यालय से रुपये मांगे गए हैं। एसबीआई भी उन्हें रुपयेे नहीं दे रहा है। अब आरबीआई शाखा के अधिकारियोें से बातचीत कर रुपये की मांग की गई है। नोट बंदी में गुरुवार को 24 शाखाएं ऐसी हैं जहां बांटने के लिए रुपये नहीं है।
कुछ ऐसा ही हाल मुख्यालय के तरौंहा स्थित इलाहाबाद बैंक का भी है। यहां तो गेट पर ही नो कैश की पर्ची टांग दी गई है। उधर, शिवरामपुर/भरतकूप क्षेत्र के बैंकों से दिनभर एक भी रुपये खाता धारकों को नहीं दिए गए। जिससे कई बार तनाव की स्थिति बनी। वहीं एक माह से नोट बंदी का खासा असर व्यापार पर पड़ा है।
दुकानदारों के पास रुपये न होने से एक माह से माल लेने बाहर नहीं गये। आए दिन ग्राहक लौट रहे है। इसके अलावा घरों में शादी होने से लोग रुपये के लिए बैंकों व अधिकारियों के चक्कर काटते रहे। लेकिन उनके रुपये नहीं दिये गये।