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बिन सिलेंडर घर में कैसे जलेगा चूल्हा

Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
Chitrakoot
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सारे काम छोड़ एजेंसियों पर लाइन लगा रहे उपभोक्ता
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चित्रकूट। जिले में सिलेंडरों की मारामारी समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। गर्मी के दिनों में सिलेंडर की गाड़ी आने की सूचना पर लोग अपना सभी जरूरी काम-धंधा छोड़कर पूरे दिन लाइन लगाते हैं तब कही जाकर लोगों को सिलेंडर मिल पाता है और कभी-कभी मिलता भी नहीं। बीते माह के बुकिंग सिलेंडर अभी तक उपभोक्ताओं को नहीं मिले है। उपभोक्ताओं का कहना है ऐसे ही रहा तो कैसे जलेगा चूल्हा।
जिले में कुल चार गैस एजेंसी मऊ, मानिकपुर, राजापुर और कर्वी में है। सभी एजेंसियों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की कतार लग रही है। जिसमें कर्वी एजेंसी से जुड़े उपभोक्ताओं को गैस के लिए सबसे ज्यादा मारामारी करने पड़ रही है। हाल यह है कि मऊ स्थित एजेंसी में कुल 5209 कनेक्शन है। उनके गैस वितरण के लिए प्रति माह 2730 सिलेंडर आते है। एक माह में नौ बार सिलेंडर आता है। इसके बाद भी उपभोक्ताओं को 15 दिन तक सिलेंडर के लिए इंतजार करना पड़ता है। यही हाल राजापुर गैस एजेंसी का है। एजेंसी में कुल 4859 उपभोक्ता हैं। यहां भी नौ बार में 2700 सिलेंडर आते है। मानिकपुर में भी उपभोक्ताओं की संख्या लगभग इतनी ही है और सिलेंडर भी नौ चक्कर में ही मिलता है। सभी क्षेत्र के उपभोक्ताओं का कहना है कि प्रतिष्ठानों में घरेलू सिलेंडर खपत से गैस की किल्लत अधिक हो गई है। उपभोक्ताआें के अनुसार 15 दिन से एजेंसी के चक्कर लगाने के बाद भी गैस नहीं मिली है।
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प्रतिष्ठानों में भरे घरेलू सिलेंडर
जनपद में घरेलू गैस सिलेंडर के सहारे प्रतिष्ठान कमाई काट रहे है और घर की रसोईयों में सन्नाटा है। उपभोक्ता काम छोड़कर सुबह से एजेंसियों पर लाइन लगा रहे है। समय बर्बाद करने के बाद भी उन्हें गैस नहीं नसीब हो रही है। वही प्रतिष्ठानों में धड़ल्ले से घरेलू गैस सिलेंडर इस्तेमाल हो रहे है। उपभोक्ताओं का कहना है ऐसे ही हालत रहे तो कोई सिलेंडर क्यों लेगा।


छह दिन से राजापुर एजेंसी के चक्कर लगा रहे है। छह दिन में 100 रुपये रिक्शा का किराया खर्च हो गया है। उसके बाद भी सिलेंडर नहीं मिला है। 10 दिन से सिलेंडर बुक है लेकिन अभी तक नहीं मिले है।
भागवत प्रसाद शुक्ल, उपभोक्ता

दस दिन से एजेंसी में कई घंटे लाइन लगा रहे है। गैस मिलना तो दूर कोई ठीक से जवाब भी नहीं देता है। पूछने पर यह तक नहीं बताते हैं कब सिलेंडर आएगा और कब बंटेगा। सिलेंडर नहीं मिला तो खाना चूल्हे पर बनेगा।
भोला नाथ सोनी, उपभोक्ता

गैस की किल्लत तो है। पहले सप्ताह में प्रतिदिन सिलेंडर वितरण होता था। इधर सप्ताह में सिर्फ दो-तीन बार ही वितरण कर पाते है। दुकानदारों पर घरेलू सिलेंडर के प्रयोग पर अंकुश लगे तो काफी हद तक किल्लत खत्म हो सकती है।
राम बहोरी एजेंसी संचालक कर्वी

जनपद के प्रतिष्ठान सिरदर्द बने है। दुकानों में घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। जिससे व्यवसायिक सिलेंडर बच जाते है। बड़े सिलेंडरों की बिक्री न होने से घरेलू सिलेंडर औसतन मात्रा में कम मिलते है। इससे समस्या होती है।
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शिवसागर मिश्रा मैनेजर मऊ एजेंसी
कोट्स
प्रतिष्ठानों में अभियान नहीं चल पाता है, क्योकि विभाग में स्टाफ की कमी है। सिलेंडर की किल्लत देखते हुए एजेंसी मालिकों से बात की गई तो पता चला कि कंपनी से उन्हें सिलेंडर ही नहीं मिल रहे है। आते जाते दुकानों में अगर घरेलू सिलेंडर दिख जाता है तो कार्रवाई होती है।
ओम प्रकाश सिंह- जिला पूर्ति अधिकारी
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