चित्रकूट। कभी भाजपा के थिंक टैंक रहे वरिष्ठ राजनीतिक चिंतक गोविंदाचार्य वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से क्षुब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इसमें सुधार की जरूरत है। वह सोमवार को दीनदयाल शोध संस्थान के विवेकानंद सार्द्ध शती समारोह संबंधी कार्यक्रम में आए थे और बाद में मुख्यालय में दृष्टि संस्था में वहां की गतिविधियां देखने पहुंचे थे।
नेत्रहीन बच्चों के कल्याणार्थ लगी दृष्टि संस्था के कार्यक्रमों और इसके स्कूलों को देखकर चकित गोविंदाचार्य ने इसकी सराहना की। कहा कि यह आश्चर्यजनक बात है कि बिना सरकारी मदद के कोई संस्था विकलांगों के लिए इतना बढ़िया काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली जाकर इसकी चर्चा करेंगे और संस्था को कुछ मदद दिलाने की पहल भी करेंगे। उन्होंने लुई ब्रेल के चित्र पर माल्यार्पण किया।
छात्रावास देखा और नेत्रहीन छात्राओं से मुलाकात की। उन्होंने ज्यादा कुछ बोलने से गुरेज करते हुए सिर्फ इतना कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य निराश करने वाला है। इस पर सभी राजनीतिक दलों को सोचना होगा और इसके बदलने का प्रयास करना होगा। राजनीति में सुधार की जरूरत है।
उधर, इसके पूर्व दीनदयाल शोध संस्थान और विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के कार्यक्रम में बोलते हुए गोविंदाचार्य ने कहा कि परिवार एक परंपरा है, रिश्तों से समाज और रिश्तेदारों को बुना जाता है। भौतिकवाद और पाश्चात्य संस्कृति स्वीकार नहीं है। नारी का सम्मान होना चाहिए। स्वदेशी पर जोर देते हुए कहा कि हम मान सम्मान वाले हैं।
हमारा इतिहास ही है कि हमने सोने की लंका को हड़पा नहीं बल्कि उसे जलाकर घमंड चूर किया है। इस मौके पर फाउंडेशन के निदेशक अजीत देओल, सांसद गणेश सिंह, आरएसएस के मधुभाई कुलकर्णी, कुलपति ग्रामोदय विवि केपी पांडे, डीआरआई के भरत पाठक और उद्यमिता विद्यापीठ की निदेशक नंदिता पाठक आदि मौजूद रहीं।