चित्रकूट। बिजली विभाग के अधिकारियों की मानी जाए तो कोतवाली भवन और इसके अंतर्गत आने वाले लगभग तीस आवासों और पुलिस अधीक्षक कार्यालय बनने के बाद से आज तक बिजली के बिलों का भुगतान ही नहीं हुआ। बिजली विभाग के आला अधिकारी हालांकि इस संबंध में कार्रवाई के मुद्दे पर शांत हैं। उधर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिजली विभाग को नोटिस देना चाहिए था, तभी कनेक्शन कराकर भुगतान कराए जाते।
बिजली विभाग अधिकारियों की मानी जाए तो जिले की कोतवाली कार्यालय के साथ यहां बने लगभग 30 आवास और पुलिस अधीक्षक कार्यालय कालूपुर में विद्युत कनेक्शन नहीं हैं। कोतवाली कालोनी और पुलिस अधीक्षक कार्यालय दोनों को मिलाकर लगभग 40 किलोवाट की दर से लगभग दो लाख प्रति वर्ष की दर से बिजली का बिल होता है। कोतवाली व पुलिस अधीक्षक कार्यालय बनने के लगभग दस साल बाद यह रकम लगभग 40 से 50 लाख रुपए बैठती है। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक आवास व पुरानी कोतवाली में हुए कनेक्शन का बिल अभी तक कोई भुगतान नहीं हुआ है। इस बात को विभाग के आला अफसर जानते भी हैं लेकिन पुलिस विभाग के खिलाफ बिजली बिल की वसूली को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि कनेक्शन न होनेे के बाद भी कोतवाली की लाइन में फाल्ट को फौरन दुरुस्त करना पड़ता है। इस संबंध में जब पुलिस विभाग के कर्मचारियों की बात की गई तो उनका कहना है कि जिन कर्मचारियों ने कमरा लिया है उनकी सेलरी से ही कट जाता है। सीओ सिटी सुरेश चंद रावत ने बताया कि वह तो बाद में आए हैं जबकि बिजली पहले से जल रही है। अगर कोतवाली या पुलिस विभाग के किसी कार्यालय में कनेक्शन नहीं है तो बिजली विभाग को इस बात के लिए पुलिस विभाग को कनेक्शन कराने के लिए नोटिस देना चाहिए था तो विभाग कनेक्शन करा लेता। एसडीओ विनोद गंगवार ने बताया कि कोतवाली में व पुलिस अधीक्षक कार्यालय में कनेक्शन न होने की जानकारी पूर्व अधिशासी अभियंता कमलेश कुमार व नए एक्सईएन सुनील कुमार को भी दी जा चुकी है। उन्हाेंने कार्रवाई की बात भी की लेकिन मामला पुुलिस विभाग से जुड़ा होने से कुछ नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षक आवास वन विभाग का होने से न तो एसपी व वनाधिकारी ही इसका भुगतान करते। इस संबंध में प्रभागीय वनाधिकारी मूलचंद्र सिंह ने बताया कि एसपी वन विभाग के रेस्ट हाउस में रहते हैं और यहां के बिलों का भुगतान वन विभाग ही करता है। हो सकता है कि कुछ दिन से बिल बकाया हो, बजट न होने की वजह से। अधिशासी अभियंता को मुझसे बात करनी चाहिए थी। वह इस मामले की जांच कराएंगे। उधर बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार ने बताया कि वह जिले से बाहर हैं वापस लौटने के बाद इस मामले को देखेंगे।
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कैसे चलती है व्यवस्था
पुलिस लाइन में आवास, पानी व बिजली की व्यवस्था देख रहे आरआई हजारी लाल का कहना है कि पुलिस लाइन में उनके यहां मेन लाइन में ही मीटर लगा है जिसका दो से तीन माह में बिजली कर्मचारी रीडिंग नोटकर ले जाते हैं। उसी के आधार पर पुलिस लाइन के बिलों का भुगतान बिजली विभाग को किया जाता है। उन्हाेंने बताया कि पुलिस विभाग ने कमरों के टाइप के आधार पर एक मानक तय कर रखा है वही धनराशि उनकी सेलरी से कटौती की जाती है। उन्हाेंने बताया कि पुलिस लाइन का तो पूरा बिल भुगतान होता है लेकिन पुलिस अधीक्षक कार्यालय व कोतवाली यहां से दूर होने के कारण उसकी व्यवस्था वह नहीं देख रहे हैं और उसके बारे में वे कुछ भी नहीं बता सकते। उनके बिल तो सीधे विभाग को जाते होगे। गौरतलब है कि पुलिस अधीक्षक अस्थायी आवास वन विभाग के डाक बंगले में ही है।