चित्रकूट। विश्व धरोहर सप्ताह 19 नवंबर से चल रहा है। चित्रकूट को पर्यटन केंद्र बनाने की बड़ी बड़ी बातें हो रही हैं पर बात तब है जब धरातल पर इनका क्रियान्वयन नजर आए। चर के सोमनाथ मंदिर, शबरी जलप्रपात, वाल्मीकि आश्रम, नादी तौरा हनुमान मंदिर, लाइना बाबा, मऊ का रिसियन पहाड़ आदि जिले में न जाने कितने पुराने और पौराणिक स्थान हैं, जो उपेक्षा से मिट रहे हैं, उपेक्षा जारी है। अगर इनको विकसित करा दिया जाए तो ददुआ, ठोकिया, बलखड़िया आदि दस्युओं के नाम पर जाने जाने वाले इस पिछड़े इलाके की पहचान बदल सकती है।
आज जिले में जिन पुराने स्थानों को विकसित करने और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की बात की जा रही है, उसको लेकर सबसे पहले इस शताब्दी के पहले वर्ष में तत्कालीन जिलाधिकारी जगन्नाथ सिंह ने चित्रकूट विकास पैकेज के तहत ले लिया था। जिले का दुर्भाग्य कहा जाएगा कि इस महत्वपूर्ण पैकेज के बिंदुओं को बाद के जिलाधिकारियों ने उतनी गंभीरता से नहीं लिया। वर्तमान जिलाधिकारी डा. बलकार सिंह और उनके पूर्ववर्ती रहे डा. आदर्श सिंह ने हालांकि इस दिशा में जरूर कुछ सकारात्मक पहल की है, जो कुछ न कुछ आशा जगाती है। चित्रकूट मुख्यालय की स्थिति कुछ ऐसी है, जिसके चारों ओर कोई न कोई महत्वपूर्ण स्थल है। अगर थोड़ी कवायद कर ली जाए तो इन स्थलों में आने वाले लोग यहां भी आएं। पूरब में 120 किमी दूरी पर प्रयाग, पश्चिम में 280 किमी पर झांसी और लखनऊ है। इसी तरह यहां से खजुराहो 174 किमी, मैहर 120 किमी, विंध्यवासिनी की दूरी 160 किमी तथा बनारस की दूरी 240 किमी है। पहले बांदा जिले में समाहित रहा यह जिला 6 मई 1997 को छत्रपति शाहूजी महाराजनगर के नाम से अस्तित्व में आया। 4 सितंबर 1998 से इसका नाम चित्रकूट कर दिया गया। चित्रकूट विकास पैकेज में जिन बातों को उल्लेख है, वह इस जिले के लिए काफी महत्व रखतीं हैं। महत्वपूर्ण यह कि इस पैकेज में उल्लिखित कुछ बातों का क्रियान्वयन किया जा चुका है, जिनमें से यमुना नदी पर राजापुर में तुलसी सेतु, परिक्रमा मार्ग पर सुलभ शौचालय, सीमेंटेड बेंच, गणेशबाग में म्यूजियम, देवांगना पर हवाई पट्टी आदि प्रमुख हैं।
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चित्रकूट पैकेज में कुछ उल्लेखनीय बिंदु
पैकेज में चित्रकूट-खजुराहो के बीच की दूरी कम किए जाने, देवांगना शिखर पर एयर स्ट्रिप का निर्माण, शबरी प्रपात पर पानी की लिफ्टिंग डिवाइस, पर्यटक स्थलों पर पहुंच मार्ग, देवांगना शिखर पर टूरिस्ट हट बनाकर टूरिस्ट विलेज बनाया जाना, कोल्हुवा को हिल स्टेशन के रूप में विकसित किया जाना, खजुराहो-चित्रकूट- राजापुर-अयोध्या राष्ट्रीय मार्ग, धार्मिक स्थलों को चित्रकूट धाम कर्वी से जोड़ने और स्पेशल ट्रेनें चलाया जाना, होटल सब्सिडी आदि। चित्रकूट पैकेज का एक और महत्वपूर्ण बिंदु यहां के लिए त्रिदिवसीय पैकेज टूर था, जिसके तहत पहले दिन कामदगिरि, भरतकूप, रामशैय्या, रामघाट, हनुमानधारा, सती अनुसूइया, गुप्त गोदावरी, राम दर्शन, कांच का मंदिर, आरोग्यधाम भ्रमण, दूसरे दिन ओहन डैम, ओहन व्यू प्वाइंट, सरैंया, मारकंडेय आश्रम, अमरावती आश्रम, विराध कुंड, शबरी प्रपात, राघव प्रपात, धारकुंडी एवं तीसरे दिन नांदी, राजापुर, बरियारी कला, बरहाकोटान, ऋषियन, परानू बाबा, दशरथ घाट, कर्का आश्रम, लौरी कला, रामनगर, बाल्मीकि आश्रम आदि का भ्रमण शामिल है।
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हर महीने आते हैं लाखों तीर्थयात्री
यहां पर हर महीने धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। हर महीने अमावस्या पर मेला लगता है और आस्थावान मंदाकिनी स्नान के बाद कामदगिरी परिक्रमा करते हैं। भदई अमावस्या, सोमवती अमावस्या पर ज्यादा भीड़ रहती है, साथ ही दीपावली पर भव्य मेला लगता है। राष्ट्रीय रामायण मेला जो डा. राममनोहर लोहिया की संकल्पना पर आधारित है, भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहने वाला आयोजन है।
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मध्यप्रदेश सीमांतर्गत चित्रकूट का भी विकास हो
चित्रकूट विकास पैकेज में उप्र के तहत मप्र की सीमा पर आने वाले इलाकों के विकास का भी प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसमें कुल मिलाकर 655 करोड़ की अनुमानित लागत आनी थी। जिले के विकास को प्रयासरत बुंदेलीसेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि वह स्वयं जिलाधिकारी से मिलकर पूर्व जिलाधिकारी के इस महत्वपूर्ण पैकेज के सपने को पूरा करने का अनुरोध करेंगे। साथ ही जनप्रतिनिधियों के जरिए भी इस पैकेज को स्वीकृत कराने का प्रयास किया जाएगा।