कोतवाली के पास रविवार रात जूता चप्पल की दुकान में शार्ट सर्किंट से लगी आग फैलने से छह दुकानें राख हो गईं। इसमें करीब दो करोड़ के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना पर पहुंचीं डीएम नीलम अहलावत और पुलिस अधीक्षक पवन कुमार ने मौका मुआयना किया।
अधिकारियों ने व्यापारियों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
रविवार रात लगभग पौने 11 बजे कोतवाली से लगभग सौ कदम की दूरी पर स्थित काशी प्रसाद गुप्ता पुत्र बाबूलाल गुप्ता की जूते-चप्पल की दुकान में अचानक आग लग गई। लपटें निकलती देख पास में फोटोकापी की दुकान किए सोनी ने शोर मचाया और कोतवाली पहुंचकर सूचना दी। इस बीच अन्य दुकानदार भी वहां पहुंच गए।
करीब बीस मिनट बाद दमकल वहां पहुंची लेकिन कुछ ही देर में इसका पानी खत्म हो गया। इससे भीड़ आक्रोशित हो गई। कुछ लोगों ने दमकल कर्मियों को भी दौड़ा लिया। पंद्रह मिनट बाद दूसरी दमकल पहुंची तो उससे भी कुछ फायदा नहीं हुआ। ऐसे में भीड़ का गुस्सा बेकाबू होने लगा। इसके बाद कई दमकल के साथ भारी फोर्स भी वहां पहुंच गई। दो घंटे बाद आग को बुझाया जा सका।
इस बीच टेलरिंग की भी पांच दुकानें राख हो गईं। इसमें करीब दो करोड़ का नुकसान हुआ है। सोमवार सुबह जिलाधिकारी नीलम अहलावत, पुलिस अधीक्षक पवन कुमार, अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार, तहसीलदार अशोक कुमार आदि मौके पर पहुंचे। डीएम ने आश्वासन दिया कि व्यापारियों के नुकसान का आंकलन कराकर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। हर संभव मदद दिलाई जाएगी। सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने भी व्यापारियों को सांत्वना दी और शासन से हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
दमकल के मामले की जांच होगी
देर से दमकल पहुंचने के व्यापारियों के आरोपों पर एसपी पवन कुमार ने कहा कि वह इस संबंध में जांच कराएंगे। व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि अगर सही समय पर दमकल पहुंचती तो शायद आग इतना न फैलती। उन्होंने बताया कि यह बात सही नहीं है कि दमकल की गाड़ियों ने काम नहीं किया। पता चला है कि जब कर्मचारी दमकल लेकर पहुंचे तो पब्लिक के होहल्ला और भीड़भाड़ की वजह से वह वाहन छोड़कर खड़े हो गए और इससे देरी हुई।
दोहरी मार का शिकार हुए व्यापारी
व्यापारी नेता शानू गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर दुकानदार किराए में दुकानें चलाते रहे हैं। ऐसे में इनका बीमा भी नहीं था। अगर बीमा होता तो कुछ मदद मिल भी जाती। उन्होंने कहा कि सभी व्यापारी एकजुट होकर अग्निपीड़ित दुकानदारों को मुुआवजा दिलाएंगे।
सिलेंडर फेंकने में कोतवाल के झुलसे हाथ
व्यापारियों ने बताया कि एक दुकान में कुछ सिलेंडर रखे थे, जिनको उठाकर फेंकने और शटर उठाने आदि में कोतवाल केपी दुबे के हाथ भी झुलस गए।
तीन महीने में दूसरा भीषण अग्निकांड
इस घटना ने पिछले साल धनतेरस की रात हुए एक इलेक्ट्रानिक्स में लगी भीषण आग की याद ताजा कर दी। ट्रैफिक चौराहे पर तब महेंद्र गुप्ता की दुकान में लगभग पचास लाख का नुकसान हुआ था। व्यापारियों में इस बात को लेकर रोष है कि अभी तक महेंद्र को सरकार की तरफ से कोई मुआवजा नहीं मिला, जबकि वे लोग हर स्तर पर गुहार कर चुके हैं।
इन व्यापारियों का हुआ नुकसान
तहसीलदार के अनुसार, जिन दुकानदारों का इस आग में नुकसान हुआ है उनमें 1- मीर मोहम्मद पुत्र शेख अहमद (टेलरिंग की दुकान- 10 लाख), 2- रामनारायण पुत्र बाबूलाल (जूते की दुकान- 35 लाख), 3-जितेंद्र सिंह पुत्र दयाराम (कपड़े की दुकान-15 लाख), 4-रामचरण पुत्र द्वारिका (कपड़े की दो दुकानें- 60 लाख), 5- मुन्नालाल पुत्र रमाकांत (कपड़े की दुकान-20 लाख), 6- उमेश चंद्र पुत्र दुर्गा प्रसाद (कपड़े की दुकान- 30 लाख)। इनके अलावा इन्हीं दुकानों के आगे सिलाई मशीन रखकर टेलरिंग करने वाले चुनबाद सोनी और जन्नू टेलर ने दस हजार रुपये के नुकसान की बात कही है।
लोगों ने की मदद की मांग
उधर, ट्रेडर्स एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष शानू गुप्ता, नारायण दास गुप्ता, शेषू जायसवाल, राकेश मोदनवाल, हरिगोपाल केशरवानी, ललित जायसवाल, अवधेश, श्याम गुप्ता, नंदकिशोर, सुनील जायसवाल, अतुल, अमित आदि ने जिलाधिकारी से व्यापारियों को जल्द अधिक से अधिक मुआवजा दिलाने की मांग की। उधर, कांग्रेस कार्यालय में भी आननफानन में बैठक बुलाई गई। जिला महासचिव जितेंद्र कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता में हुई बैठक में भीषण अग्निकांड के पीड़ितों को 25-25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की गई।