चित्रकूट। लॉकडाउन के कारण दिल्ली महाराष्ट्र और गुजरात से आने वाले वाहनों को जिले की सीमा पर ही रोका गया। इन वाहनों में सवार लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराने के बाद चिह्नित स्कूल और कॉलेज के भवनों में होम क्वारंटीन कराया गया है। मुख्यालय के शिवरामपुर व बेडीपुलिया में 284 लोगों को रखा गया है। पूरे जिले में ऐसे लोगों की संख्या लगभग पांच सौ है। डीएम शेषमणि पांडेय, एसपी अंकित मित्तल, सीडीओ डा. महेंद्र कुमार व सीएमओ डा. विनोद कुमार ने ग्रामीणों से मिलकर हालचाल जाना उनके खाने व ठहरने के इंतजाम का निरीक्षण किया। इसी बीच राजापुर व मऊ क्षेत्र के सीमा क्षेत्र में रात को बाहरी जनपद से आए चार बसों के ग्रामीणों को अधिकारियों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराकर गांव भेज दिया है। इन अस्थाई कैंप में ठहरे कुछ ग्रामीणों ने खाने पानी का सही इंतजाम न होने की बात कही है। इस संबध में अधिकारियों ने जानकारी न होने की बात कही है।
लॉकडाउन कड़ाई से लागू कराने के लिए प्रदेश सरकार के आदेश के बाद रविवार की रात से ही जिले की सभी सीमाओं पर अधिकारी व पुलिस बल ने सख्ती अपनाई। दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात व अन्य प्रांत जिलों से ग्रामीणों की आने की सूचना पर स्वास्थ्य टीम भी मौके पर तैनात रही। बांदा कानपुर लखनऊ की ओर से आने वाले वाहनों को भरतकूप में रोका गया। सीडीओ डा. महेंद्र कुमार ने बताया कि 148 ग्रामीणों को बेडीपुलिया के इंटर कालेज व 136 को शिवरामपुर आईटीआई में ठहराया गया है। सरधुआ व चकौंध के कस्तूरबा कालेज मेें भी ऐसे ग्रामीणों को ठहराया गया है। मऊ एसडीएम राजबहादुर ने बताया कि बरगढ के पास इंटर कालेज व पालीटेक्टिनक कालेज में ऐसे ग्रामीणों को ठहराया जा रहा है। राजापुर एसडीएम राहुल विश्वकर्मा ने बताया कि सरधुआ व आसपास के कालेज अधिकृत किए गए हैं। पूरे जिले में लगभग 500 से अधिक ग्रामीणों को ऐसे स्थानों पर अस्थाई होम क्वारंटीन में रखा गया है। डीएम शेषमणि पांडेय के साथ एसपी अंकित मित्तल ने इन अस्थाई होम क्वारंटीन का सुबह से निरीक्षण कर स्वास्थ्य परीक्षण की रिपोर्ट चेक की। सभी ग्रामीणों को नाश्ता व भोजन के साथ दवाओं की उपलब्धता कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। सुरक्षा के लिए इन स्थानों पर पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
स्वास्थ्य परीक्षण कराकर सीधे भेजा गांव
चित्रकूट। बरगढ़ व राजापुर प्रतिनिधि के अनुसार रात को बाहरी जनपद से कई वाहनों में अन्य प्रांत के मजदूर आदि आए। जिनका सिर्फ स्वास्थ्य परीक्षण कराकर सीधे उनके गांव भेज दिया गया है। इस मामले में सीडीओ डा. महेंद्र कुमार ने बताया कि इसकी जानकारी नहीं है। संबंधित क्षेत्र के एसडीएम से जानकारी ली जाएगी।
सुरक्षित गांव पहुंचने की चिंता
चित्रकूट। अस्थाई होम क्वारंटीन में ठहरे बरियारी मऊ गांव की रामपति ने बताया कि उसके बच्चे दो दिन से भूखे थे। दिनरात सुरक्षित गांव पहुंचने की चिंता थी। यहां आकर खुद को सुरक्षित तो महसूस कर रहे हैं लेकिन अपने गांव जल्द जाने की इच्छा है। मौके पर नन्हेें श्रीकेश, राजू व रमिया ने तोतली भाषा में कहा कि भूख लगी है। वह इससे अंजान हैं कि कहां हैं और किस कारण यहां ठहरे हैं। इनके परिजनों ने बताया कि हम सब दिल्ली के पास क्रशर मिल में काम करते हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते काम बंद हो गया है, जिससे उनके सामने जीवन यापन का संकट आ गया। एक सप्ताह से गांव लौटने के लिए परेशान थे। इटखरी गांव की गोमती देवी ने बताया कि भरपेट भोजन नहीं मिला है। भोपाल से लौटे छात्र अमर सिंह, अंकित ओझा ने बताया कि वह मऊ के रहने वाले हैं। किसी तरह यहां पहुंचे हैं लेकिन भोजन न मिलने से वह परेशान हैं।
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प्रशासन कर रहा है भोजन का इंतजाम
चित्रकूट। शिवरामपुर के अस्थाई होम क्वारंटीन आईटीआई में इन ग्रामीणों की देखरेख के लिए नियुक्त सेक्टर मजिस्ट्रेट संजय मिश्रा ने बताया भोजन आदि का इंतजाम प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। उनसे इससे मतलब नहीं है। यह भी बताया कि उनका मोबाइल काम नहीं करता है। इन ग्रामीणों को कहां भेजा जाना है इसकी भी जानकारी नहीं है।