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154 साल पहले मराठों ने शुरू की थी रामलीला

Thu, 22 Sep 2016 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
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तरौंहा में रामलीला मंचन की फाइल फोटो। - फोटो : amarujala
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शहर के पुरानी बाजार में होने वाली रामलीला की शुरुआत 154 साल पहले मराठों ने की थी। अंग्रेजों के शासनकाल में कई बार इस पर अड़ंगे भी लगे लेकिन धर्मनगरी के लोगों के हौसले के आगे अंग्रेज पस्त हो गए। शुरुआत में संगीत की धुन पर होने वाला रामलीला का मौन मंचन आज आधुनिक भक्ति धुनों के बीच लोगों की आस्था व श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। श्रीरामलीला कमेटी इस बार 155वां आयोजन करने जा रही है। इसकी तैयारियां पूरी हो गईं हैं।
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 धर्मनगरी में रहने वाले मराठा शासक के वंशज काशीनाथ राव गोरे ने 1962 में यहां रामलीला की शुरूआत कराई। इसके बाद श्रीरामलीला कमेटी को  पास निजी जमीन मिल गई। सेठ हरवंश प्रसाद गौरी शंकर केशरवानी आदि ने चंदा कर भवन का निर्माण कराया। रामलीला में पुरुषोत्तम रिछारिया, सरजू चौरसिया, महादेव शुक्ला, चौरसिया, चुन्ना, विजय मिश्रा व बसंत गोरे आदि के सहयोग से रामलीला होने लगी। अब यहां की रामलीला का रूप परिवर्तित हो गया है।

प्रसंग वहीं हैं स्थान वही है, बस संगीत व सजावट का दौर बदल गया है। वर्तमान समय में श्रीरामलीला कमेटी के प्रबंधक श्याम गुप्ता, अध्यक्ष अशोक केशरवानी, सचिव विजय मिश्रा, महेेंद्र अग्रवाल, छुआरा बाबू, किशन श्रीवास्तव आदि पदाधिकारी व सदस्य रामलीला कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रामलीला शुरू कराने वाले मराठों के वंशज बसंत गोरे का कहना है कि सन 1862 से ही इसी स्थान पर मंचन शुरू हुआ था। कई दशक तक पुरानी कमेटी कार्य करती रही। इस समय नव युवकों ने कमेटी की कमान संभाल ली है। जिसमें मथुरा व वृंदावन के कलाकार रामलीला करते हैं। स्थानीय महेंद्र केशरवानी ने बताया कि कई साल तक तो कुछ अंग्रेज अधिकारी मंचन में सहयोग भी करने लगे थे।
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आज से शुरू होगी रामलीला
चित्रकूट। श्रीरामलीला कमेटी के सचिव विजय मिश्रा ने बताया कि 23 सितंबर से नारद मोह से रामलीला शुरू होगी जो 12 अक्टूबर तक चलेगी। 24 सितंबर को श्रीराम जन्मोत्सव से शुरू होने वाली लीला के अंतिम दिन 11 अक्टूबर को रावण वध होगा।
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