चित्रकूट के विकास के लिए सीमा विवाद बना रोड़ा
चित्रकूट। धर्मनगरी को भले ही यूपी व एमपी की सरकार ने फ्री जोन घोषित कर दिया हो। लेकिन धर्मनगरी की समस्याओं का निराकरण नहीं हो पाया। लोकसभा सभा चुनाव में एक बार फिर से बहस शुरू हो गई है। ताकि चित्रकूट पर्यटन स्थल का विकास हो सके।
धर्मनगरी में सीमा में अधिकतर तीर्थ स्थान है। यहां तक भगवान कामदगिरि की परिक्रमा भी यूपी व एमपी दोनों क्षेत्रों में पड़ती है। यहां के साधु संत मांग करते रहे है कि चित्रकूट को फ्री जोन घोषित कर दिया जाए। यह क्षेत्र केंद्र सरकार की देखरेख में कर दिया जाए। जिससे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ व मध्यप्रदेश सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने चित्रकूट को फ्र्री जोन घोषित कर दिया था। जिसमेेें सीमा क्षेत्र से वैरियर लगाकर वाहनों से वसूली बंद हो गई थी। इसके अलावा अन्य नियम उसी तरह से बने हुए है। जिससे तीर्थ यात्रियों को समस्या का सामना करना पड़ता है।
मंदाकिनी नदी के अभियान में आ रही रूकावट
चित्रकूट। यूपी-एमपी सीमा के कारण मंदाकिनी नदी की अच्छी तरह से सफाई नहीं हो पा रही है। नदी में कई स्थानों पर छोटे पुल बनाकर नदी का पानी रोक रखा है। जिससे प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है।
परिक्रमा मार्ग में गंदगी बनी रहती
चित्रकूट। परिक्रमा मार्ग पर गंदगी बनी ही रहती है। दोनों प्रदेशों के सफाई कर्मचारी एक दूसरे पर अरोप मढ़ते रहते है। यूपी क्षेत्र में नगर पालिका तो एमपी क्षेत्र में नगर पंचायत के देखरेख में कार्य होता है।
चुनाव के समय ही आता याद
चित्रकूट। धर्मनगरी के साधु संत महंत दिव्यजीवनदास, महंत ओंमकारदास, संत नवलेश दीक्षित का कहना है कि चुनाव के समय नेता धर्मगरी के यूपी-एमपी सीमा के विवाद को समाप्त करने की बात करते है। इसके बाद भूल जाते हैं।