पर्व के मद्देनजर लोगों ने सुबह स्नान के बाद तिल, गुण और खिचड़ी खाई। इसके साथ ही दान का संकल्प भी लिया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पर्व पर दान का विशेष महत्व बताया गया है।
हालांकि पर्व को लेकर लोगों में उहापोह की स्थिति रही। कुछ लोगोें ने बुधवार को पर्व मनाया तो अधिकतर लोग गुरुवार को पर्व को मान्यताओं के अनुसार मनाएंगे। बच्चों और युवाओं ने जमकर पतंगबाजी की। पतंग की दुकानों पर पतंग और मंझे की खरीदारी के लिए भीड़ लगी रही। वहीं दूसरी तरफ आर्य समाज मंदिर की तरफ से पर्व पर देवयज्ञ का आयोजन किया गया।
इस दौरान लोगों को प्रसाद के रूप में खिचड़ी बांटी गई। इस अवसर पर चंद्रव्रतानंद जी ने पर्व के महत्व को बताते हुए कहा कि दक्षिणायन और उत्तरायण अर्थात कर्क राशि और मकर राशि का संक्रांति का सभी की दिनचर्या पर पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। इस अवसर पर शशिकांत आर्य, छोटेलाल, प्रमोद, नंदलाल आदि उपस्थित रहे।