कंदवा। मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी को नियंत्रित करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरहनी में मरीजों को दवाओं के साथ एबीसीडीई मंत्र अपनाने की सलाह दी जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि इस पद्धति को नियमित दिनचर्या में शामिल करने से शुगर नियंत्रण में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
बरहनी पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश कुमार सिंह ने बताया कि 30 वर्ष की आयु के बाद प्रत्येक व्यक्ति को हर साल डायबिटीज की जांच अवश्य करानी चाहिए। वर्तमान में हर छह में से एक व्यक्ति मधुमेह से प्रभावित है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं दिखाई देते, इसलिए इसे खामोश बीमारी भी कहा जाता है। समय पर जांच, सही जानकारी और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि शरीर में इंसुलिन हार्मोन भोजन से बनने वाले ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाने का कार्य करता है। इंसुलिन का पर्याप्त मात्रा में न बनना (टाइप-1) या सही तरीके से कार्य न करना (टाइप-2) रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ा देता है। बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, बिना कारण वजन घटना, लगातार थकान महसूस होना और घाव का देर से भरना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
इनसेट.....
एबीसीडीई मंत्र
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ए (आहार) : थाली का आधा हिस्सा हरी सब्जियां और सलाद, एक चौथाई प्रोटीन तथा एक चौथाई अनाज रखें। मीठे और मैदे से दूरी बनाएं।
बी (बॉडी): प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तेज चाल से टहलें या योग करें।
सी (चेकअप): समय पर दवा लें और हर तीन महीने में शुगर की जांच कराएं।
डी (डी-स्ट्रेस): तनाव से दूर रहें और प्रतिदिन 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लें।
ई (वजन नियंत्रण): केवल पांच प्रतिशत वजन कम करने से भी ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मिल सकती है मदद।
कोट......
पीएचसी में मधुमेह की निशुल्क जांच की जाती है। एबीसीडीई आधारित जीवनशैली अपनाने वाले मरीजों के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। - डॉ. राजेश कुमार सिंह, प्रभारी चिकित्साधिकारी, बरहनी, पीएचसी।