किसानों की दलहनी और तिलहनी फसल पकने की कगार पर है। ऐसे में मौसम की आंखमिचौली किसानों को परेशान कर रही है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यदि बरसात हुई, तो किसानों को नुकसान हो सकता है। ऐसे में किसानों को चाहिए कि समय से फसलों की मड़ाई करा लें और उन्हें सुरक्षित रखने का प्रयास करें।
बीएचयू में कवक और पादप रोग विशेषज्ञ प्रो. रमेश चंद्रा ने बताया कि गेहूं सहित दलहनी और तिलहनी फसल कुछ दिनों बाद पकने वाली हैं। अगैती खेती करने वाले किसानों ने फसलों की मड़ाई भी शुरू कर दी है। परेशानी पिछैती खेती करने वालों के लिए है। यदि इस समय बरसात होती है तो खेत में खड़ी फसल भींग जाएगी और वापस धूप होने पर दाने छिटककर खेतों में गिर जाएंगे। इससे किसानों को काफी नुकसान होगा। यदि किसानों की फसल खलिहान में तब भी नुकसान होगा। भींगने से दाने सड़ने की आशंका है। ऐसे में उचित यही है कि किसान शीघ्र ही फसलों की मड़ाई शुरू करा दें और उन्हें सुरक्षित घरों में रखें। घुन से बचने के लिए गेहूं को सल्फास के साथ कोठार में रख दें।
रबी वर्ष 2016-17
फसल क्षेत्रफल (हेक्टेयर)
गेहूं 100230
जौ 979
चना 3741
मटर 2013
मसूर 15322
सरसों 354
अलसी 1099
तोरिया 1776
मक्का 22