पीडीडीयूनगर। एक माह की राहत के बाद रसोई गैस सिलिंडरों के मूल्य में की गई वृद्धि से निचले व मध्यम वर्ग के परिवारों की चिंता बढ़ गई है। सरकार ने आम लोगों पर महंगाई का बड़ा बोझ डालते हुए रसोई गैस सिलिंडर की कीमतों में 66 रुपये का इजाफ कर दिया है। वहीं व्यवसायिक सिलेंडर भी 110 रुपये महंगे हो गए हैं। इससे पहले सेही गरीबी की मार झेल रहे गरीब व मध्यम वर्ग की गृहिणियों के लिए रसोई संभालना मुश्किल हो गया है। उन्होंने सरकार से रसोई गैस सिलिंडरों के बढ़े मूल्य वापस लेने की मांग की है।
वैश्विकमहामारी कोरोना वायरस संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए 25 मार्च सेलागू लॉकडाउन के दौरान जहां उज्जवला गैस धारकों को तीन माह तक मुफ्त सिलेंडर दिया गयावहीं आम लोगों के लिए भी रसोई गैस की कीमत कम कर दी गई थी। इससे लोगों ने राहत की सांस ली थी। इसके बाद एक जून से रसोई गैस सिलिंडर की कीमत में वृद्धि करने से लोगों में रोष है। भारत गैस एजेंसी के महेशकुमार व इंडेन गैस एजेंसी के संजय राय ने बताया कि नए रेट के अनुसार अब 14.2 किलो वाला सिलिंडर 587 रुपये की बजाए 66 रुपये बढ़ाकर 653 रुपये पर पहुंच गया है। गैस सिलिंडरों की कीमत में बढ़ोत्तरी के बाद पहले से महंगाई से परेशान लोगों पर अधिक बोझ़ बढ़ जाएगा।
गैस का दाम बढ़ने बढ़ी दिक्क्त
असना गांव निवासी प्रीति सिंह का कहना है कि रसोई गैस का दाम बढ़ा कर सरकार ने पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे लोगों को महंगाई की आग में झोंकने का काम किया है। घोसवा गांव निवासी प्रियंका सिंह का कहना कि महंगाई और कोरोना जैसी महामारी के दौर में गैस की कीमत में की गई वृद्धि मुंह से निवाला छीनने के समान है। इस बढ़ोतरी के बाद खाना पकाना और भी महंगा हो जाएगा। केंद्र सरकार ने महंगाई की आग में घी डालने का काम किया है। इलिया निवासी निरुपमा केशरी का कहना है कि एक ओर कोरोना महामारी को लेकर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमत स्थिर बनी हुई है वहीं सरकार रसोई गैस सिलिंडरों के मूल्य में वृद्धि कर रही है। यह गरीब जनता के साथ छल है। सैदूपुर निवासी सुषमा केशरी ने कहा कि कोरोना महामारी को लेकर वैसे ही कमाई कम हो गई है। ऐसे में रसोई गैस सिलिंडरों के मूल्य बढ़ाने के फैसले को कहीं से उचित नहीं कहा जा सकता। चहनिया क्षेत्र के रानेपुर (खंडवारी) गांव की माधुरी का कहना है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे लोगों पर रसोई गैस सिलिंडरों की बढ़ी कीमतें भारी पड़ सकती है। रसोई गैस सिलिंडरों की कीमत इसी प्रकार बढ़ती रही तो मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। वहीं कस्बा की सुष्मिता ने कहा कि खाद्य पदार्थों के पहले से बढ़े मूल्यों से किचन संभालना मुश्किल हो रहा था। इसके बाद रसोई गैस सिलिंडरों के बढ़े मूल्य ने आग में घी डालने का काम किया है।
बढ़ी कीमतों को वापस लेना चाहिए
चकिया नगर की वार्ड नंबर छह निवासी संध्या चौरसिया ने कहा कि गैस सिलिंडरों की बढ़ी कीमतों ने सबसे ज्यादा असर गरीब व मध्यम दर्जे के लोगों पर डाला है। सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार कर बढ़ी कीमतों को तत्काल वापस लेना चाहिए। शिकारगंज की पूनम ने बताया कि तीन माह तक उज्जवला योजना के लाभार्थियों को राहत देने के बाद सरकार ने गैस सिलिंडरों की कीमत बढ़ाकर उनके साथ छल किया है। अब उनके लिए रसोई का खर्च संभालना कठिन हो जाएगा। कृष्णा नगर निवासी नीरा यादव ने कहा कि कोरोना महामारी को लेकर पहले से ही बेरोजगारी बढ़ी हुई है। इसके बाद बढ़े दाम से रसोई गैस लेना मुश्किल हो गया है। सरकार को गैस सिलिंडरों के दाम कम करने चाहिए। कुढ़ेखुर्द निवासी गिरजा का कहना है कि पहले तो गृहिणियां कोयले व उपले पर भी खाना बना लेती थीं पर अब वे पूरी तरह रसोई गैस सिलिंडर पर आश्रित हैं। ऐसे में गैस सिंलिंडर के मूल्य बढ़ने से उनके लिए रसोई संभालना मुश्किल हो जाएगा।