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गांवों में बने क्वारंटीन सेंटर पर गर्मी से बेहाल हैं लोग

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पीडीडीयू नगर। कोरोना वायरस के चलते परदेश से लौट रहे प्रवासियों के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांवों में क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैँ। ताकि 14 दिन तक उन्हें सुरक्षा और स्वास्थ्य के नजरिये से परिवार और लोगों से दूर रखा जा सके। इसके लिए जिले में 37 क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं मगर उनकी हालत बहुत अच्छी नहीं है। सबसे अधिक समस्या बिजली की है। भीषण गर्मी के चलते हो रही कटौती से सेंटरों पर क्वारंटीन लोगों का रात काटना मुश्किल हो रहा है। हैंडपंप से पानी तो मिल जा रहा है मगर मच्छर जीने नहीं दे रहे हैं। एक या दो शौचालय हैं जिसका इस्तेमाल सेंटर पर रहने वाले कर रहे हैं। इससे संक्रमण बढ़ने का खतरा है। वहीं जो लोग होम क्वारंटीन हैं वे गांव की गलियों में घूम रहे हैं।
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कोरोना वायरस के चलते लाकडाउन के बाद जिले में 13 हजार से अधिक लोग बसों, ट्रेनों, पैदल और अन्य साधनों से लौट चुके हैं। इसमें 5500 से अधिक लोग क्वारंटीन की अवधि पूरा कर घर को जा चुके हैं। लेकिन अभी भी सात हजार से अधिक लोग होम क्वारंटीन या फिर प्रशासन की ओर से बनाए 37 क्वारंटीन सेंटरों पर रह रहे हैं। इसमें ज्यादातर प्रशासन की ओर से बने सेंटरों पर हैं। वहां लोगों को इस भीषण गर्मी में काफी परेशानी हो रही है। प्राइमरी स्कूलों और कालेेजों में बने क्वारंटीन सेंटरों की छत तप रही है। बिजली, पानी और खाने पीने की समुचित व्यवस्था न होने से लोग घरों को भाग रहे हैं। इसकी निगरानी के लिए प्रशासन की ओर से निगरानी समिति बनाई गई है। जो लोगों की निगरानी कर रही है।
कंदवा संवाददाता के अनुसार गांवों में परिषदीय विद्यालयों और सामुदायिक भवनों पर बने क्वारन्टीन सेंटरों परआने वाले सभी प्रवासियों को एक ही सेंटर में रखा जा रहा है। जहां मात्र एक या दो शौचालय हैं। इसी का प्रयोग सभी प्रवासी कर रहे हैं। गंदगी के चलते संक्रमण का खतरा है। यह स्थिति विकास खंड के लगभग सभी क्वारंटाइन सेंटरों में सामने आ रही है। कम्हरिया गांव स्थित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय पर बने क्वारन्टीन सेंटर पर 90 प्रवासी क्वारंटीन किए गए हैं। जिनके सोने के लिए चारपाई, मास्क और डिटाल साबुन की व्यवस्था प्रधान द्वारा लगातार की जा रही है। 90 कोरेन्टीन लोगों में से सात लोगों ने नए लोगों के आने और उनसे संक्रमण फैलने के भय से सोमवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरहनी पर जांच करा कर स्वंय को होम क्वारंटीन कर लिया। चिरईगांव में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर बने सेंटर पर बिजली की व्यवस्था है लेकिन पंखे लोगों के घरों से आए हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालय पर दो महिला अपने अपने पतियों के साथ क्वारंटीन हैं। गांवों में कोरेन्टीन सेंटरों की निगरानी के लिए निगरानी समिति का गठन किया गया है लेकिन उसके बाद भी होम क्वारन्टीन किए गए लोग गांव की गलियों में घूमते नजर आ रहे हैं और रोकने- टोकने वे वाद विवाद और मारपीट पर उतारू हो जा रहे हैं। सकलडीहा संवाददाता के अनुसार डॉ. अंबेडकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है लेकिन वहां लोग होम क्वारंटीन हैं। इसी तरह इलिया के डेहरी कला में भी बिजली, शौचालय की दिक्कत है।
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