व्योमेश शुक्ल ने कहा कि हमारा घमंड पश्चिम की देन है। सवाल यह है कि क्या हम भारत को यूरोप बना देना चाहते हैं। उन्होंने गंगा प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कहा कि पहले पानी को गंदा करना और फिर उसे साफ करने की कोशिश करना उचित तरीका नहीं है। यदि गंगा हमारी धार्मिकता का मुकुट हैं तो उनमें अवजल क्यों मिलाया जाता है।
उन्होंने कहा कि इसका निदान स्पष्ट है। मलजल को नदियों में नहीं बहाया जाना चाहिए, बल्कि उसके निस्तारण की अलग व्यवस्था हो। गंगा को डस्टबिन की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
इससे पहले युवा लेखकों के दल ने नागरीप्रचारिणी सभा परिसर में स्थापित तीनों कला दीर्घाओं का अवलोकन किया। कार्यक्रम में अक्षत, राघव, तापस, विनायक, स्वाति, अपूर्वा, आकाश, विशाल, शाश्वत, त्रयी और तरुण आदि मौजूद रहे।