सिंचाई के उपकरणों पर 90 प्रतिशत तक किसानों को अनुदान मिलेगा। उद्यान विभाग की वेबसाइट पर पंजीयन कराकर किसान इसका लाभ ले सकते हैं। ड्रिप, पोर्टेबल स्प्रिंकलर व रेनगन से सिंचाई करने पर पानी की बरबादी नहीं होती है। सरकार इनके उपयोग के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। ड्रिप व स्प्रिंकलर की मदद से टपक विधि से सिंचाई की जाती है। इससे पानी पौधों की जड़ों में ही जाता है। सिंचाई के लिए मेड़ व नाली बनाने की जरूरत नहीं होती है। जड़ों में पानी देने से खेतों में खरपतवार नियंत्रित रहता है।
कृषि विज्ञानी अभयदीप गौतम ने बताया कि ड्रिप सिंचाई पद्धति से लवणीय भूमि में भी बागवानी संभव है। फसलों में बीमारी व कीड़े-मकोड़ों पर प्रभावी नियंत्रण रहता है। इससे फसल उत्पादन की क्षमता दो गुना हो जाती है।
ड्रिप, स्प्रिंकलर व रेनगेन से खेतों की सिंचाई के लिए उद्यान विभाग ने 14 सौ हेक्टेयर खेतों की सिंचाई के लिए अनुदान की मांग की है। ड्रिप से आम, अमरूद, आंवला, नींबू, बेल, बेर वाले पौधे आदि में सिंचाई की जाती है। पांच वर्ष तक रोपित पौधों के अलावा टमाटर, बैगन, भिंडी, मिर्च, शिमला मिर्च, आलू की भी सिंचाई की जाती है। गुलाब, औषधि पौधे की सिंचाई में ड्रिप का प्रयोग कारगर है। स्प्रिंकलर से मटर, गाजर, व्यवसायिक फसलें, पत्तेदार सब्जी व कृषि फसलों की सिंचाई होती है।
पंजीकरण के लिए यह जरूरी
सिंचाई यंत्र की खरीदारी पर अनुदान लेने के लिए किसान को नजदीकी जन सेवा केंद्र पर जाकर पंजीकरण कराना होगा। इसके लिए खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति व पासपोर्ट साइज फोटो की आवश्यकता होगी। विभाग की वेबसाइट पर आवेदन ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
कोट
जल संचयन व अधिक उत्पादन के लिए बागवानी, कृषि व गन्ना फसलों में ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति की स्थापना की योजना है। खरीफ सीजन में सिंचाई यंत्र की खरीद पर 65 से 90 फीसद तक अनुदान दिया जाएगा। इस सिस्टम से कम खर्च में अधिक उत्पादन होगा। - अलका श्रीवास्तव, जिला उद्यान अधिकारी।
रिपोर्टअमरेंद्र पांडेय