सरकारी क्रय केंद्र गेहूं की खरीद कर ही नहीं पा रहे हैं। 65 दिनों में मात्र 1375.9 टन गेहूं की खरीद हो पाई है। अब खरीद के लिए दस दिन शेष हैं। इतने कम दिनों में 80 हजार टन का लक्ष्य हासिल करना असंभव लग रहा है। गेहूं की खरीद के लिए 60 केंद्र बनाए गए हैं। अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हुई थी। अब तक मात्र 1375.9 टन गेहूं खरीद हो पाई है। विभाग की ओर से 80 हजार टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। किसान क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचना ही नहीं चाहते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है कि बाजार में ही गेहूं का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक है। व्यापारी किसान के घर से गेहूं खरीद रहे हैं। इसमें तो ढुलाई की झंझट है और न ही अनाज को साफ करने की।
किसानों ने गेहूं बिक्री के लिए पंजीकरण तो करा लिया लेकिन क्रय केंद्रों पर नहीं गए। 5051 किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया है। इसमें महज 536 किसानों ने क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचा है।
जनपद में 60 गेहूं के केंद्रों का संचालन किया जा रहा है लेकिन अब तक 1375.9 टन गेहूं की खरीदारी हुई है।अभी भी खरीदारी जा रही है। प्रयास है कि अधिक से अधिक गेहूं किसानों का खरीदा जाए।सौरभ कुमार यादव जिला विपणन अधिकारी