UP Politics: 1991 में बीजेपी ने यहां खाता खोला और लगातार तीन बार 91, 96 और 98 में भारतीय जनता पार्टी के आनंदरत्न मौर्य सांसद निर्वाचित हुए। 1999 में सपा के जवाहरलाल जायसवाल, 2004 में बसपा के कैलाशनाथ सिंह यादव, 2009 में सपा के रामकिशुन यादव और 2014 और 2019 में बीजेपी के डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय ने जीत दर्ज की।
चंदौली में 1952 में हुए पहले आम चुनाव में यहां कांग्रेस पार्टी ने जीत दर्ज की थी। 1962 तक यहां कांग्रेस अजेय रही। 1952 और 57 में डॉ. राममनोहर लोहिया को भी यहां हार का सामना करना पड़ा था। 1952 और 1957 दोनों ही चुनाव में उन्हें कांग्रेस पार्टी के त्रिभुवन नारायण सिंह ने शिकस्त दी थी।
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त्रिभुवन नारायण सिंह बाद में यूपी के सीएम भी बने। 1967 में चंदौली में सोशलिस्ट पार्टी के निहाल सिंह सांसद बने। 1971 में कांग्रेस ने फिर वापसी की और सुधाकर पांडेय ने यहां से जीत दर्ज की। 1977 के चुनाव में निहाल सिंह ने जनता पार्टी और 1980 में जनता दल से चुनाव जीता। 1984 में फिर कांग्रेस की वापसी हुई और कमलापति त्रिपाठी की बहू चंद्रा त्रिपाठी सांसद निर्वाचित हुईं।
1989 में जनता दल के टिकट पर कैलाशनाथ सिंह सांसद चुने गए। 1991 में बीजेपी ने यहां खाता खोला और लगातार तीन बार 91, 96 और 98 में भारतीय जनता पार्टी के आनंदरत्न मौर्य सांसद निर्वाचित हुए। 1999 में सपा के जवाहरलाल जायसवाल, 2004 में बसपा के कैलाशनाथ सिंह यादव, 2009 में सपा के रामकिशुन यादव और 2014 और 2019 में बीजेपी के डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय ने जीत दर्ज की।
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जातिगत आंकड़ा
18 लाख से ज्यादा मतदाताओं वाली चंदौली लोकसभा सीट में सबसे ज्यादा यादव हैं। यहां यादव मतदाताओं की संख्या करीब दो लाख 75 हजार है। वहीं दलितों का वोट भी ढाई लाख के आसपास है। पिछड़ी जाति में आने वाले मौर्य बिरादरी की आबादी 1 लाख 75 हजार है। जबकि राजपूत, ब्राह्मण, राजभर और मुस्लिम भी करीब एक-एक लाख के आसपास हैं।