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दबिश देने नहीं, दबंगई दिखाने जाती है यूपी पुलिस : अखिलेश यादव

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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को कहा कि यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है। चंदौली की घटना इसका प्रमाण है। पुलिस थाने अराजकता का केंद्र बन चुके हैं। सरकार ने चुनाव जीतने के लिए पुलिस को लगाया था। पुलिस से गलत काम सरकार कराएगी तो उसकी दबंगई भी नहीं रोक पाएगी। मनराजपुर गांव में एक मई को पुलिस की दबिश के दौरान मृत निशा यादव के परिजनों से मुलाकात के बाद वह पत्रकारों से बात कर रहे थे।
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अखिलेश यादव ने कहा कि हमें पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है। सरकार और पुलिस कभी भी कोई रिपोर्ट बदलवा सकती है। इस मामले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज करें तो न्याय हो सकता है। कहा कि सरकार बुलडोजर लेकर घूम रही है। सरकार बताए कि ललितपुर और सैयदराजा थाने के दोषी पुलिसकर्मियों के घरों पर कब बुलडोजर चलवाएगी? पुलिस के कारनामे एक नहीं है। सबसे ज्यादा कस्टोडियल डेथ और सबसे ज्यादा फर्जी इनकाउंटर उत्तर प्रदेश में हुए हैं। नेशनल ह्यूमन राइट्स और महिला आयोग के सबसे ज्यादा नोटिस यूपी सरकार को मिले हैं।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि यूपी के थानों में दलाली का सेंसेक्स बढ़ रहा है। थानों में जाति के आधार पर कार्रवाई और धर्म के आधार पर बुलडोजर चलवाया जा रहा है। भाजपा की सरकार में जाति के आधार पर काम हो रहा है। जाति के आधार पर और जनप्रतिनिधि को खुश करने के लिए कहां किसकी पोस्टिंग करनी है, कहां किसको बैठाना है, कहां किसको फंसाना है, किसको किस जांच में ले जाना है, यह तरीका उत्तर प्रदेश की सरकार अपना रही है। कल मुख्यमंत्री ललितपुर में कह रहे थे कि रामराज्य आ गया। जहां उन्हीं की सरकार की पुलिस के एक अधिकारी ने थाने में दुष्कर्म किया हो, वहां वह रामराज्य की बात कर रहे हैं। यह कैसा रामराज्य है? मुख्यमंत्री से जब शिकायत की गई कि अधिकारी लूट रहे हैं, भ्रष्टाचार कर रहे हैं तो वह अपने जनप्रतिनिधियों को कहते हैं कि पहले आप दलाली रोक लो। यानी की मुख्यमंत्री यह मानते है कि उनकी ही पार्टी के लोग दलाली में संलिप्त हैं।
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