नहर का तटबंध टूटने से पास के खेतों में भर गया पानी।
क्षेत्र के खझरा गांव के समीप फत्तेपुर मड़ई के पास राइट कर्मनाशा नहर का तटबंध शनिवार की देर शाम दस मीटर तक टूट गया। इससे करीब 200 बीघा खेत जलमग्न हो गया और हाल ही में रोपी गई धान का पौध भी डूब गई। किसानों को इससे फसल नष्ट होने की आशंका हो गई है। यही नहीं खेतों के सहारे घरों तक भी पानी पहुंच सकता है।
सूचना पाकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने रविवार की सुबह नहर बंद करा दी। टूटे नहर की मरम्मत के लिए दोपहर तक मजदूरों ने बालू की बोरिया लगाने का काम शुरू कर दिया है।
लतीफशाह बांध से निकली राइट कर्मनाशा नहर द्वारा क्षेत्र के हजारों एकड़ फसलों की सिंचाई के साथ ही बिहार के कैमूर जिले के कुछ भागों के खेतों की सिंचाई होती है। धान की नर्सरी तैयार होने के बाद रोपाई के लिए इन दिनों नहरों में पानी छोड़कर कैमूर तक पानी दिया जा रहा है। इसी बीच शनिवार की देर शाम फत्तेपुर मड़ई गांव के समीप नहर का तटबंध टूट गया। इससे गत दिनों आसपास के गांवों में भी रोपाई की गई लगभग 200 बीघा जलमग्न हो गया। पूरे इलाके में जलप्लावन जैसी स्थिति हो गई है। रोपे गए पौधे पानी में डूब गए हैं। पानी से सबसे अधिक नुकसान बेन तियरी गांव के किसानों का हुआ है। किसान पारस यादव, रामसेवक यादव, सुरेश यादव, सनेही पासवान, कैलाश पासवान, छटंकी यादव, रामप्रवेश, मुन्नू सिंह, वकील सिंह, हवलदार सिंह, संतोष सिंह, अरविंद, अंगद सिंह आदि किसानों को भारी क्षति उठानी पड़ी है। किसानों का कहना है कि पौधे नष्ट होने से उन्हें खाने के लिए चावल एवं पशुओं के चारा का भी गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। किसानों ने प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मुआवजे की मांग की है।