चंदाैली में कई लोगों पर हो चुका है बंदरों का हमला।
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वाराणसी से पकड़कर चंदौली के जंगलों में छोड़े गए बंदर कहर बरपा रहे हैं। चकिया, शिकारगंज और नौगढ़ क्षेत्र में बंदरों हमले से अब तक दो लोगों की मौत और 20 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। बुधवार को हेतिमपुर गांव के पांच साल के बालक हर्षिल की भी बंदरों के हमले से जान चली गई थी। वहीं, वन विभाग ने बंदरों को पकड़ने से मना कर दिया है।
चंदौली के जंगल में बंदरों की संख्या बहुत कम थी। पिछले कुछ वर्षों से वाराणसी से बंदरों को पकड़कर चंदौली के जंगलों में छोड़ा जा रहा है। इससे चंदौली के जंगल में इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ये बंदर जंगल से गांवों का रुख कर रहे हैं और लोगों पर हमले भी कर रहे हैं।
आसपास के गांवों में बंदरों की वजह से लोग परेशान हैं। घरों में घुसकर सामान तहस-नहस करने कर देते हैं। जो सामान पाते हैं, उसे उठा ले जाते हैं या नष्ट कर देते हैं। यही नहीं, विरोध करने पर ये लोगों पर हमला कर देते हैं।
वर्ष 2022 में सिकंदरपुर गांव में विनय पाठक की पुत्री नैंसी पाठक और प्रियांशी पाठक बंदरों के हमले से छत से गिरकर घायल हो गई थीं। इलाज के दौरान प्रियांशी की मौत हो गई थी। वहीं, बुधवार को हेतिमपुर गांव में पांच साल के बालक हर्षिल की बंदरों के हमले से जान चली गई थी।
बंदरों को पकड़ने के लिए गत दिनों चकिया नगर पंचायत ने मथुरा से टीम को बुलाया था। सैकड़ों बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ा गया था लेकिन वे फिर से बस्ती में लौट आए हैं। उधर, वन विभाग भी अपने हाथ खड़ा कर चुका है।
बोले अधिकारी
बंदरों को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम से बाहर कर दिया गया है। बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत और नगर निकायों की है।
- दिलीप श्रीवास्तव, डीएफओ