जूड़ा हरधन गांव के कई खेतों में खड़ी बीस एकड़ से अधिक की फसल पानी में डूब गई। कारण बलुआ पंप कैनाल से निकली नहर की खुदाई पूरी न होने से पहले ही पानी छोड़ दिया जाना है।
जबकि गांव में भी बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। गांव स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में भी पानी जमा हो गया। इसे लेकर किसानों में सिंचाई विभाग के प्रति भारी नाराजगी है।
बलुआ पंप कैनाल से निकली नहर द्वारा क्षेत्र के मटियरा, विशेषरपुर, महुअर, हरधन, जूड़ा, मड़ई, सगरा, पूरा गनेश आादि गांवों में सिंचाई होती है। देखरेख के अभाव में नहर पूरी तरह पट गई।
यही नहीं कई गांव के लोगों ने नहर की भूमि पर कब्जा कर मकान आदि बना लिया है। पिछले दिनों किसानों की मांग पर एक बार फिर नहर की खुदाई शुरू हुई लेकिन भूमि पर कब्जा होने की वजह से पूरी नहर की खुदाई नहीं हो सकी।
अधूरी खुदाई के बाद ही नहर में शुक्रवार की रात पानी छोड़ दिया गया। इससे जूड़ा हरधन गांव में पानी जमा हो गया। यही नहीं खेतों में पानी जमा होने से बीस एकड़ गेहूं की फसल भी डूब गई। जबकि कई घरों के साथ ही पूर्व माध्यमिक विद्यालय परिसर में भी पानी इकट्ठा हो गया।
शनिवार को स्कूल बंद होने की वजह से कोई समस्या तो नहीं आयी लेकिन पानी की निकासी जल्दी न होने से पठन पाठन प्रभावित हानेे की आशंका है।
शनिवार की सुबह जलजमाव के बाद इसकी सूचना सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी गई तब पानी बंद हुआ लेकिन अभी भी गांव में जलजमाव की स्थिति बनी हुई है।
गांव के अजीत सिंह, उदयशंकर तिवारी, लालता यादव, मुंशी यादव, मुन्ना सिंह, संजीत सिह, पुजारी सिंह, पप्पू सिंह आदि ने पानी निकासी करने और नहरों की पूरी खुदाई कराने की मांग की है।